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हल्द्वानी – 15 वर्षीय रेप पीड़िता ने बच्चे को जन्म दियाः पड़ोसी ने दोस्ती के बहाने किया था शोषण

हल्द्वानी में पड़ोस में रहने वाले एक लड़के ने पहले 14 साल की बच्ची से दोस्ती की। फिर बहला-फुसलाकर उसके साथ जबरदस्ती संबंध बनाए। मामले का खुलासा तब हुआ, जब बच्ची के पेट में अचानक दर्द उठा और परिजन उसे जून में सरकारी अस्पताल ले गए।वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद परिवार को विश्वास में लेकर इसकी सूचना पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस ने मामला पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया। मामला कोर्ट में गया और कोर्ट ने आदेश दिया कि बच्ची की उम्र कम है और ऐसे हाई रिस्क में बच्ची मां नहीं बन सकती।इसके बाद अब 15 वर्षीय किशोरी ने एक बच्चे को जन्म दिया है। अस्पताल में महिला डॉक्टरों की विशेष निगरानी में किशोरी का सुरक्षित प्रसव कराया गया। फिलहाल अस्पताल में भर्ती जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।दोस्ती के नाम पर दरिंदगी, जून में पेट दर्द के बाद हुआ खुलासा- बनभूलपुरा थाना क्षेत्र की रहने वाली 14 वर्षीय बच्ची से पड़ोस में रहने वाले युवक ने पहले दोस्ती की। इसके बाद उसे बहला-फुसलाकर उसके साथ जबरदस्ती संबंध बनाए।इस दरिंदगी का खुलासा तब हुआ, जब जून के महीने में बच्ची के पेट में अचानक तेज दर्द उठा और परिजन उसे इलाज के लिए सरकारी अस्पताल ले गए।. डॉक्टरों की जांच में सामने आई गर्भावस्था, पॉक्सो में केस दर्ज- अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों को बच्ची के गर्भवती होने की बात पता चली। डॉक्टरों ने परिजनों को ढांढस बंधाया और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत पुलिस को सूचना दी।परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।कोर्ट पहुंचा मामला; डॉक्टरों की देखरेख में कराया गया सुरक्षित प्रसव – नाबालिग के गर्भवती होने पर मामला कोर्ट पहुंचा। डॉक्टरों की राय और स्थिति की समीक्षा के बाद अब 15 वर्षीय किशोरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया।महिला डॉक्टरों की विशेष निगरानी और हाई रिस्क डिलीवरी प्रोटोकॉल के तहत किशोरी का सुरक्षित प्रसव कराया गया। किशोरी ने एक बच्चे को जन्म दिया है और फिलहाल जच्चा-बच्चा दोनों परी तरह स्वस्थ हैं. कानूनी साक्ष्यों के लिए कोर्ट की अनुमति से होगा DNAटेस्ट- मामले में आरोपी के खिलाफ अदालती साक्ष्यों को मजबूत करने के लिए पुलिस नवजात शिशु के DNA टेस्ट की अनुमति लेगी। कोर्ट के निर्देश पर डॉक्टरों का एक विशेष पैनल नवजात का डीएनए सैंपल लेगा, जिसे जांच के लिए भेजा जाएगा।फिलहाल मेडिकल टीम किशोरी और नवजात की सेहत पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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