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हल्द्वानी- सुशीला तिवारी अस्पताल में एक बेड पर दो मरीज,हालत चिंताजनक
मीनाक्षी
हल्द्वानी। हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में 100 बेड का गायनी वार्ड पूरी तरह पैक हो गया है। हालत यह है कि एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। यह नहीं मरीजों को दूसरे वार्ड में भी शिफ्ट किया जा रहा है जिसके चलते इलाज में दिक्कत आ रही है। कुमाऊं के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसटीएच में कुमाऊं भर से महिला मरीज इलाज के लिए पहुंचती हैं। ज्यादातर मरीज गंभीर होते हैं जिसके चलते इन्हें रेफर कर यहां भेजा जाता है।मरीजों की स्थिति को देखते हुए उन्हें ऑब्जरवेशन में रखना पड़ता है। अस्पताल के गायनी वार्ड में 100 बेड है जो पूरी तरह से पैक हो चुके हैं।ऑब्जरवेशन के चलते एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। जिससे मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा भी बना हुआ है। वहीं जो मरीज थोड़ा ठीक हैं उन्हें गायनी वार्ड से शिफ्ट कर ‘के वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। 50 प्रतिशत डॉक्टरों की कमी स्त्री रोग विभाग में डॉक्टरों की 50 प्रतिशत से ज्यादा कमी है। इसके चलते उनके लिए ओपीडी, आईपीडी व ऑपरेशन के कामों को अंजाम देना काफी तनाव भरा हो रहा है। मेडिकल कॉलेज में स्त्री रोग विभाग मेडिसिन के बाद दूसरे नंबर पर है जहां पर डॉक्टरों की कमी है।एसएनसीयू की सुविधा नहीं होने से बढ़े मरीज कुमाऊं भर से प्रसव के लिए आने वाली ज्यादातर गर्भवतियों को इसलिए रेफर किया जाता है कि उनके पेट में पल रहे बच्चे में कई जारी जटिलताएं आ गई होती हैं। प्रसव के तुरंत बाद नवजात को एसएनसीयू की जरूरत होती है। पर्वतीय इलाकों के ज्यादातर अस्पतालों में एसएनसीयू की सुविधा नहीं होने के चलते गर्भवती महिलाओं को एसटीएच रेफर कर दिया जाता है जिससे यहां पर मरीजों की संख्या बढ़ गई है। सफेद हाथी है महिला अस्पताल का एसएनसीयू राजकीय महिला अस्पताल में 12 बेड का एसएनसीयू है। हैरानी की बात यह है कि वहां से भी प्रसव के लिए आई महिलाओं के पेट में पल रहे बच्चे में कांप्लिकेशन बताकर एसटीएच रेफर किया जा रहा है। जिसके चलते महिला अस्पताल में प्रसव की संख्या काफी गिर गई है। मरीजों की संख्या ज्यादा होने के चलते एक बेड पर दो मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। कुछ मरीजों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट भी किया गया है। डॉक्टरों की भारी कमी के चलते काम का दबाव ज्यादा है। बावजूद इसके मरीजों को हर संभव इलाज देने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। डॉ. गोदावरी जोशी, एचओडी, स्त्री रोग विभाग, एसटीएच

