उत्तराखण्ड
कुमाऊं की आर्थिक राजधानी में नया कदम: निजी ऑपरेटरों द्वारा चलेंगी पर्यावरण अनुकूल बसें
हल्द्वानी, कुमाऊं की आर्थिक राजधानी, में बढ़ते ट्रैफिक और यात्रियों की संख्या को देखते हुए शासन ने शहर में सिटी बसों के संचालन का निर्णय लिया है। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने सर्किट हाउस काठगोदाम में आयोजित रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की बैठक में इस फैसले को मंजूरी दी, जिसके तहत निजी ऑपरेटरों द्वारा बसों का संचालन किया जाएगा। निजी ऑपरेटरों को बस खरीदने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है, जबकि पूर्व में दायर आवेदनों की समीक्षा के बाद 168 किलोमीटर के दायरे में विभिन्न रूट निर्धारित किए गए हैं।
निर्धारित रूट में रानीबाग से रोडवेज बस स्टैंड, स्टेडियम रोड, मुखानी, कुसुमखेड़ा, ब्लॉक, फतेहपुर, लामाचौड़, भाखड़ा, कठघरिया, चौफुला चौराहा, चंबलपुल, पनचक्की और हाइडिल गेट तक के रास्ते शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बस स्टेशन से मंगलपड़ाव, गांधी स्कूल, तीनपानी, उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी, टीपीनगर, देवलचौर, पंचायत घर, पाल कॉलेज, कुसुमखेड़ा, लालडांठ, पनचक्की, मुखानी तथा कालाढूंगी चौराहे, काठगोदाम रेलवे स्टेशन से सर्किट हाउस, स्टेडियम, तीनपानी, गोरा पड़ाव, गन्ना सेंटर, टीपीनगर, एसटीएच, धान मिल, पीलीकोठी और मुखानी से लेकर सिंधी चौराहा, रामपुर रोड, देवलचौड़, बिड़ला स्कूल, गैस गोदाम रोड, सेंट्रल अस्पताल तक के रूट भी तय किए गए हैं। कुछ अन्य रूटों में दुर्गा सिटी सेंटर, नवाबी रोड, कमलुवागांजा, भांखड़ा, ऊंचापुल आदि रास्ते शामिल हैं, जिससे यात्रियों को शहर के विभिन्न हिस्सों में सुविधा से पहुंच मिल सके।
सभी बसें पर्यावरण के अनुकूल सीएनजी या बीएस-VI मानकों पर आधारित होंगी, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी। इन बसों में महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी तथा इन्हें एक विशेष रंग में पेंट किया जाएगा ताकि आसानी से पहचाना जा सके। प्रत्येक बस में सीसीटीवी कैमरा, जीपीएस, डिजिटल रूट डिस्प्ले और बड़े अक्षरों में अंकित रूट नंबर दिए जाएंगे। संचालन का समय गर्मियों में सुबह 6:30 से रात 8:30 तक और सर्दियों में सुबह 8:00 से रात 8:30 तक निर्धारित किया गया है।
इस सेवा से हल्द्वानी में यातायात व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे कॉलेज के छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और आम जनता को यात्रा में सुविधा मिलेगी। साथ ही, यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
















