Uncategorized
उत्तराखंड को सौगात: सहसपुर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी जलाशय, नैनीताल में खैरना बैराज प्रोजेक्ट को मंजूरी

उत्तराखंड के विकास को नई रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने कई बड़े फैसलों पर मुहर लगा दी है। सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति (Expenditure Finance Committee) की अहम बैठक में प्रदेश की कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई गई। इस बैठक में कुल आठ बड़े प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से पांच सबसे जरूरी प्रस्तावों को प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी दे दी गई है। बाकी बचे तीन प्रस्तावों को और ज्यादा बारीकी से जांच-परख और समीक्षा करने के लिए फिलहाल सुरक्षित रखा गया है।बैठक में पेयजल और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दो सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है। इनमें मुख्यमंत्री की घोषणा से जुड़ा देहरादून के सहसपुर स्थित पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी जलाशय प्रोजेक्ट शामिल है, जिसकी लागत 326.64 करोड़ रुपये है। इस जलाशय के बनने से क्षेत्र में पानी की किल्लत से बड़ी राहत मिलेगी। इसके साथ ही नैनीताल जिले के लोगों और सैलानियों की सहूलियत के लिए 382.40 करोड़ रुपये की ‘खैरना बैराज पेयजल परियोजना’ को भी हरी झंडी मिल गई है। ये दोनों ही प्रोजेक्ट आने वाले दिनों में राज्य की जल व्यवस्था और बुनियादी ढांचे की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाएंगे।प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के सफर को आसान बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नैनीताल जिले के बेतालघाट ब्लॉक में दुनिघाट से रातिघाट (पाडली) तक कैंची धाम बाईपास मोटर मार्ग के डामरीकरण और सुधारीकरण कार्य के लिए 21.81 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गई है। सड़क चौड़ी और बेहतर होने से कैंची धाम यात्रा के दौरान लगने वाले लंबे जाम से निजात मिलेगी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री घोषणा के तहत राज्य संपत्ति विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) के जरिए बागेश्वर जिले में 13.15 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक ‘सर्किट हाउस’ के निर्माण को भी स्वीकृति दी गई है। इससे जिले में प्रशासनिक और पर्यटन स्तर पर अवस्थापना सुविधाओं को मजबूती मिलेगी।हरिद्वार में आयोजित होने वाले ‘कुंभ मेला-2027’ को भव्य और साफ-सुथरा बनाने के लिए शहरी विकास विभाग और नगर निगम हरिद्वार के अंतर्गत एकीकृत स्वच्छता संचालन के लिए 25 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को पारित किया गया है। कुंभ की सफाई व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सख्त हिदायत दी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों और काम करने वाले सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति का सटीक हिसाब रखने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल अनिवार्य किया जाए। अधिकारियों को साफ कहा गया है कि सफाई कर्मियों और एजेंसियों की असल तैनाती की जांच के बाद ही उन्हें भुगतान किया जाए, ताकि पूरी व्यवस्था पारदर्शी और जवाबदेह बनी रहे।बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने रुद्रप्रयाग शहर के मास्टर प्लान (फेज-1) और बीरोंखाल के स्यूंसी झील निर्माण प्रोजेक्ट की समीक्षा करने के निर्देश दिए। रुद्रप्रयाग ड्रेनेज प्लान को लेकर मुख्य सचिव ने सख्त निर्देश दिए कि घरों का गंदा पानी किसी भी हाल में सीधे नदियों में न गिरे। इसके लिए सीवेज और अपशिष्ट जल प्रबंधन की ठोस व्यवस्था की जाए। वहीं, केदारनाथ धाम में चल रहे बुनियादी ढांचे, सब-स्टेशन पैनल और अन्य निर्माण कार्यों के बजट बढ़ोतरी वाले प्रस्ताव को समीक्षा के लिए रोका गया है। मुख्य सचिव ने पर्यटन और पीडब्ल्यूडी विभाग को निर्देश दिए कि बढ़ी हुई लागत का फिर से भौतिक सत्यापन किया जाए और ठोस वजहों के साथ संशोधित प्रस्ताव लाया जाए।मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी विभागीय अधिकारियों को कड़े शब्दों में हिदायत दी कि किसी भी प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले उसकी तकनीकी, भू-वैज्ञानिक और वित्तीय मंजूरियां समय पर पूरी कर ली जाएं। बार-बार बजट बढ़ाने (Cost Escalation) के चलन पर रोक लगाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि बिना किसी बहुत बड़े कारण के लागत बढ़ाने वाले दोबारा प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सभी विकास कार्यों में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और काम की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाए, ताकि सरकारी पैसे की बर्बादी न हो और योजनाओं का फायदा सीधे जनता को तय समय के भीतर मिल सके।बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, पीडब्ल्यूडी सचिव डॉ. पंकज पांडेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, नियोजन विभाग के श्रीधर बाबू अद्दांकी समेत शासन के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।





