उत्तराखण्ड
एक क्लास-नशे के खिलाफ: युवाओं को बचाने की मुहिम शुरू, पुलिस स्कूलों में देगी जागरूकता की क्लास
जनपद में लगातार बढ़ रही नशे की समस्या को देखते हुए अब पुलिस ने इससे निपटने के लिए एक नई और असरदार पहल शुरू की है। ‘एक क्लास-नशे के खिलाफ’ नाम से चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस विभाग अब सीधे स्कूल और कॉलेजों तक पहुंचेगा और युवाओं को नशे के खतरे से अवगत कराएगा। प्रथम चरण में 49 इंटर और डिग्री कॉलेजों का चयन किया गया है, जहां पुलिस अधिकारी खुद जाकर छात्रों से संवाद करेंगे और उन्हें नशे से दूर रहने की प्रेरणा देंगे।
बनभूलपुरा समेत कई इलाके नशे के मामलों में बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। चरस, स्मैक, अफीम के साथ-साथ अब नशीले इंजेक्शन और नशा बढ़ाने वाली दवाओं की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है। हर महीने पुलिस द्वारा 10 से 12 मामलों में नशीले पदार्थों की बरामदगी हो रही है, जो इस गंभीर स्थिति की पुष्टि करता है। पुलिस तस्करों को पकड़ तो लेती है, लेकिन वे जेल से छूटकर फिर उसी धंधे में लग जाते हैं। बार-बार गिरफ्तारी के बावजूद तस्करी की श्रृंखला की अंतिम कड़ी तक पुलिस नहीं पहुंच पा रही है।
इसी को ध्यान में रखते हुए अब पुलिस ने तस्करों के लिए तैयार होने वाले संभावित बाजार यानी युवाओं को ही जागरूक करने का फैसला लिया है। पुलिस का मानना है कि यदि युवाओं को समय रहते नशे से होने वाले नुकसानों की जानकारी दे दी जाए, तो तस्करों को ग्राहक मिलना ही मुश्किल हो जाएगा। यह अभियान सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक प्रयास है, जिसमें एसओ से लेकर एसपी स्तर के अधिकारी खुद स्कूल-कॉलेजों में जाकर छात्रों से बातचीत करेंगे।
पुलिस अधीक्षक प्रहलाद नारायण मीणा का कहना है कि युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। इसी सोच के तहत यह अभियान शुरू किया गया है, जिसके अंतर्गत अधिकारी आधे से एक घंटे तक छात्रों से संवाद करेंगे, उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करेंगे और उन्हें नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे। अप्रैल माह के भीतर इस अभियान को चुने गए संस्थानों में लागू कर दिया जाएगा, जिससे उम्मीद की जा रही है कि युवा वर्ग में एक सकारात्मक बदलाव आएगा और नशे के कारोबार पर एक सशक्त प्रहार किया जा सकेगा।
















