उत्तराखण्ड
रामनगर वन प्रभाग में पहली बार हुई बाघों की गणना: हर कैमरा ट्रैप में दर्ज हुई मौजूदगी, संख्या में वृद्धि के संकेत
उत्तराखंड के रामनगर वन प्रभाग में पहली बार फेज-4 के तहत बाघों की गणना पूरी हो चुकी है, जिससे वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक नई पहल की शुरुआत हुई है। इस बार की गणना में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि हर एक कैमरा ट्रैप में बाघों की मौजूदगी दर्ज हुई है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है।
जनवरी 2025 में इस गणना के लिए रामनगर वन प्रभाग के कोटा, देचौरी, फतेहपुर और कालाढूंगी रेंज में कुल 350 कैमरा ट्रैप लगाए गए थे। पहली बार 480 स्क्वायर किलोमीटर के इस जंगल में इतनी व्यापक स्तर पर बाघों की गणना की गई है। इससे पहले, रामनगर वन प्रभाग को नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की ओर से हर चार साल में जारी होने वाली ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब यहां भी हर साल गणना संभव हो सकेगी, जिससे बाघों की वास्तविक स्थिति और उनकी सुरक्षा को लेकर बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा।
पिछली गणना के अनुसार, इस क्षेत्र में कुल 67 बाघों की उपस्थिति दर्ज की गई थी, जबकि इस बार हर कैमरा ट्रैप में बाघों की गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं। गणना के दौरान 175 अलग-अलग स्थानों पर 350 कैमरे लगाए गए थे, जिनमें बाघों की निरंतर चहलकदमी कैद हुई। फिलहाल वन विभाग द्वारा इस डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है और जल्द ही आधिकारिक रूप से बाघों की संख्या घोषित की जाएगी। इस पहल से वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षण कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि यह न केवल वन्यजीव संरक्षण बल्कि पर्यावरण संतुलन और पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे बाघों की वास्तविक संख्या का पता चलेगा और उनके संरक्षण के लिए प्रभावी नीतियां बनाई जा सकेंगी। बाघों की बढ़ती संख्या से न केवल जंगल का पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा, बल्कि रामनगर वन प्रभाग भी अब कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की तरह बाघों के लिए एक सुरक्षित आवास के रूप में उभर रहा है। वन विभाग द्वारा जल्द ही गणना के आधिकारिक आंकड़े जारी किए जाएंगे, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार बाघों की संख्या में कितना इजाफा हुआ है।
















