उत्तराखण्ड
हल्द्वानी काठगोदाम: बैली ब्रिज से 70 नट-बोल्ट चोरी, पुल की सुरक्षा पर गंभीर संकट
हल्द्वानी के काठगोदाम इलाके में बैली ब्रिज से 70 नट-बोल्ट चोरी होने की घटना ने सभी को हैरान कर दिया है। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के राष्ट्रीय राजमार्ग डिवीजन के अधिकारियों ने इसकी जानकारी आयुक्त दीपक रावत को दी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पुल काठगोदाम पुलिस चौकी से महज सौ मीटर की दूरी पर स्थित है और दोनों ओर सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए हैं। इसके बावजूद, इतनी बड़ी संख्या में नट-बोल्ट चोरी हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
यह बैली ब्रिज 2022 में कलसिया नाले पर पुराने ब्रिटिशकालीन पुल के समानांतर बनाया गया था। पुराने पुल पर यातायात का दबाव बढ़ने के कारण इसका निर्माण किया गया, ताकि वाहनों की आवाजाही सुचारू रूप से हो सके। खासतौर पर जब से कैंची धाम की लोकप्रियता बढ़ी है, तब से हल्द्वानी-काठगोदाम से लेकर रानीबाग तक ट्रैफिक कई गुना बढ़ गया है। भारी और हल्के वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण पुल के नट-बोल्ट ढीले होते रहते थे और विभाग नियमित रूप से उनकी मरम्मत करवाता था। हाल ही में जब पुल की जांच की गई, तो अधिकारियों ने पाया कि वहां से 70 नट-बोल्ट गायब थे, जिससे पुल की मजबूती पर खतरा मंडराने लगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी व्यस्त सड़क पर, जहां चौबीसों घंटे वाहन चलते हैं, वहां से इतने बड़े और भारी नट-बोल्ट आखिर चोरी कैसे हो गए? चोरी हुए नट-बोल्ट साधारण नहीं, बल्कि काफी मजबूत और भारी थे, जिनमें से हर एक का वजन लगभग डेढ़ सौ ग्राम से अधिक था। यह घटना साफ संकेत देती है कि इसके पीछे कोई संगठित गिरोह हो सकता है, जो इस तरह की चोरियों को अंजाम देता है।
इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन सतर्क हो गया है। पुल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि इस चोरी के पीछे छिपे अपराधियों का पता लगाया जा सके। स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यह सिर्फ एक चोरी नहीं, बल्कि पुल की संरचनात्मक सुरक्षा और सड़क यातायात की निर्बाधता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह इस चोरी का पर्दाफाश कर अपराधियों को पकड़ने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था करे।
















