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उत्तराखण्ड

एम. चंदोला होम्योपैथिक कॉलेज विवाद, छात्रों का भविष्य अधर में

एम. चंदोला होम्योपैथिक कॉलेज विवाद, रजिस्ट्रार पर मनमानी के आरोप


रुद्रपुर। एम. चंदोला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, रुद्रपुर के बी.एच.एम.एस. (सत्र 2018-19) छात्र-छात्राओं का भविष्य इन दिनों अधर में लटका है। अनिवार्य एक वर्षीय इंटर्नशिप शुरू करने के लिए जरूरी अनंतिम पंजीकरण (Provisional Registration) नहीं मिलने से छात्र परेशान हैं।

कॉलेज प्रशासन का कहना है कि छात्रों ने राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग और विश्वविद्यालय के मानकों के अनुरूप शिक्षा पूर्ण की है। अंकतालिकाएं, पासिंग सर्टिफिकेट, चरित्र प्रमाण पत्र और ऑनलाइन आवेदन सहित सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए गए हैं। बावजूद इसके, उत्तराखंड होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार डॉ. शैलेन्द्र पांडेय पंजीकरण में अनावश्यक विलंब कर रहे हैं।

भेदभाव और भ्रष्टाचार के आरोप

छात्रों का आरोप है कि उन्हें “काउंसलिंग” और “गैर-काउंसलिंग” के आधार पर बांटकर पंजीकरण रोका जा रहा है, जबकि ऐसा कोई प्रावधान नियमों में नहीं है। चर्चा है कि प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाकर अनुचित आर्थिक लाभ की मांग की जा रही है।

कॉलेज प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया कि रजिस्ट्रार अपने मूल पद मेडिकल ऑफिसर (पे-ग्रेड 6600) पर रहते हुए भी “रजिस्ट्रार” (पे-ग्रेड 4200) के पद पर कार्यरत हैं और शासन को आर्थिक क्षति पहुँचा रहे हैं।

संस्थान की मांगें

  1. सभी छात्रों को बिना भेदभाव के तत्काल पंजीकरण दिया जाए।
  2. इंटर्नशिप प्रक्रिया शीघ्र शुरू कराई जाए।
  3. रजिस्ट्रार की मनमानी और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच हो।

जब राष्ट्रीय आयोग और विश्वविद्यालय के नियम स्पष्ट हैं तो उत्तराखंड होम्योपैथिक बोर्ड में यह “अड़ंगा संस्कृति” क्यों? क्या शासन-प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप करेगा या छात्र इसी तरह असुरक्षा में भटकते रहेंगे?

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