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उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य से जुड़ा विवाद: फर्जी दस्तावेज केस में आरोपी कल्पना को कोर्ट से मिली जमानत, सामने आए चौंकाने वाले दावे

उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य और उनके पति के नाम व पते के दुरुपयोग के मामले में आरोपी कल्पना मिश्रा …और पढ़ें

एआई जेनरेटेड है।
एआई जेनरेटेड है।

बरेली। उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति के नाम व पते का दुरुपयोग करने के मामले में घिरी कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी को कोर्ट ने राहत दी है। जेल में बंद कल्पना को अपर सत्र न्यायाधीश-आठ अशोक कुमार यादव की अदालत ने पचास हजार रुपये व्यक्तिगत मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत दाखिल करने की शर्त पर जमानत दे दी है।

मामला नौ सितंबर 2024 का है। उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास तथा खेल मंत्री रेखा आर्य ने थाना बारादरी में प्राथमिकी लिखाई। आरोप था कि आगरा निवासी कल्पना मिश्रा, उनके और उनके पति गिरधारी लाल साहू के नाम और बरेली स्थित आवास के पते का अपने आधार कार्ड व पासपोर्ट जैसे व्यक्तिगत दस्तावेजों में अनधिकृत इस्तेमाल कर रही हैं।

आरोप था कि कल्पना अवैध रूप से उत्तराखंड शासन का बोर्ड, नीली-लाल बत्ती और हूटर लगी क्रेटा कार में घूमकर जनता में धाक जमाती है। नाम का सहारा लेकर अवैध धन उगाही करती है और उनके बरेली आवास से सात लाख रुपये नकद व एक सोने से जड़ी रुद्राक्ष माला चुराकर ले गई। हालांकि, अदालत के समक्ष बचाव पक्ष के वकील ने बेहद चौंकाने वाले तथ्य पेश करते हुए दावों को पूरी तरह खारिज किया।

बचाव पक्ष का तर्क था कि कल्पना को जुलाई 2022 में मंत्री के पति ने अपने व्यापार की देखभाल के लिए 25 हजार रुपये महीने के वेतन पर बकायदा रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के जरिए मैनेजर नियुक्त किया था, लेकिन बाद में उनका मानसिक, शारीरिक व आर्थिक शोषण किया गया। बकाया मांगने पर राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर झूठे मुकदमे में फंसा दिया गया।

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बचाव पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि शुरुआती जांच अधिकारी ने गहन पड़ताल के बाद आरोपों को गलत मानते हुए फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी थी, लेकिन मंत्री की आपत्ति के बाद दोबारा विवेचना कराई गई।

दोनों पक्षों की दलीलें और केस डायरी का गहन अवलोकन करने के बाद जज अशोक कुमार यादव ने टिप्पणी की कि आधार कार्ड का पता बदला जा सकता है और पासपोर्ट का पुलिस सत्यापन होता है।

साथ ही आरोपित महिला बीते 14 जुलाई से न्यायिक हिरासत में है तथा मामले का विचारण मजिस्ट्रेट स्तर का है। अदालत ने आरोपित को साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने और हर तारीख पर अदालत में पेश होने जैसी सख्त शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।

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