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तेल संकट के बीच लालकुआं में ‘काला खेल’—डिपो के बाहर खुलेआम तेल चोरी

मीनाक्षी

लालकुआं। देशभर में पेट्रोल-डीजल और गैस की किल्लत के बीच लालकुआं में तेल माफियाओं का संगठित गिरोह सक्रिय हो चुका है। हैरानी की बात यह है कि इंडियन ऑयल डिपो के ठीक बाहर और आसपास खुलेआम टैंकरों से तेल चोरी हो रही है, लेकिन जिम्मेदार तंत्र या तो अनजान बना है या कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहा है।

बच्चीधर्मा स्थित इंडियन ऑयल डिपो से कुमाऊं के विभिन्न हिस्सों में जाने वाले टैंकरों से रास्ते में ही तेल गायब हो रहा है। सूत्र बताते हैं कि यह कोई इक्का-दुक्का मामला नहीं, बल्कि पूरा संगठित नेटवर्क है। माफिया पहले से तय चालकों के साथ मिलकर डिपो से निकलते ही टैंकरों को सुनसान जगहों या तय ठिकानों पर रुकवाते हैं और फिर जरीकैन व डिब्बों में तेल निकाल लिया जाता है।

दो किलोमीटर तक फैला है ‘नेटवर्क’

डिपो से लेकर करीब दो किलोमीटर दूर वीआईपी गेट तक यह अवैध खेल जारी है। सड़क किनारे बने छोटे ठिकाने, सर्विस सेंटर, होटल-ढाबे—सब इस काले कारोबार के अड्डे बन चुके हैं। सुबह और रात के समय टैंकरों की संदिग्ध आवाजाही और रुकने का सिलसिला आम बात हो गई है।

नहर और कारें बनीं ‘छिपाने की जगह’
डिपो के बाहर बनी सूखी नहर अब तेल माफियाओं का स्टोरेज पॉइंट बन चुकी है। जरीकैन और डिब्बों को पहले नहर में छिपाया जाता है, फिर मौका मिलते ही कारों के जरिए उन्हें ठिकाने लगाया जाता है। आसपास घूमती संदिग्ध गाड़ियां इस पूरे खेल की गवाही देती हैं।

मिलीभगत के बिना मुमकिन नहीं खेल
टैंकर चालक, माफिया और कथित तौर पर कुछ अंदरूनी लोग—इस पूरे नेटवर्क की रीढ़ माने जा रहे हैं। सवाल उठता है कि कोतवाली से महज कुछ दूरी पर चल रहे इस धंधे की भनक पुलिस को क्यों नहीं लग रही?

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कोतवाल बोले—छापेमारी होगी
कोतवाल ब्रजमोहन राणा ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं था, लेकिन शिकायत गंभीर है। डिपो प्रबंधन से बातचीत कर औचक छापेमारी की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

पहले भी हो चुका है भंडाफोड़
गौरतलब है कि पूर्व में सीओ अभिनय चौधरी ने इसी तरह के तेल चोरी रैकेट का पर्दाफाश कर कई लोगों को जेल भेजा था। कुछ समय के लिए यह धंधा थमा जरूर, लेकिन अब फिर से तेज़ी से पैर पसार चुका है।
सवाल बड़ा है—तंत्र कब जागेगा?

जब देश तेल संकट से जूझ रहा है, ऐसे में लालकुआं में खुलेआम हो रही तेल चोरी न सिर्फ प्रशासनिक विफलता को उजागर करती है, बल्कि आम जनता के हिस्से पर भी सीधा डाका है। अब देखना यह है कि तंत्र जागता है या यह काला खेल यूं ही चलता रहेगा।

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