पुस्तक समीक्षा -सुदामा पाडे ‘धूमिल‘ के काव्य मे सामाजिक यथार्थ

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हल्द्वानी। कुमाउनी भाषा बिरादरी मे आपणि पछ्याण और नौ दर्ज करणी।दुदबोलि दगाड़ जीणी और गढ़वाली कुमाउनी मासिक पत्रिका कुमगढ़क उप संपादक डाॅ0 जगदीश चन्द्र पन्त ज्यूक हाल में प्रकाशित ग्रंथ ‘सुदामा पांडे‘ धूमिल‘ के काव्य मे सामाजिक यथार्थ। हिन्दी साहित्यक एक ठुल शोध ग्रंथ छु भारतीय खाद्य निगम में राजभाषा अधिकारी क रूप में साहित्य प्रति उनुल जो प्रत्यक्ष अनुभव करौ वीकी परिणति छी कि उनुल शोधक विषय साहित्यक एक शीर्ष कवि सुदामा पाडंे ‘धूमिल‘ कै चुनौ। धूमिल आपण युगक साहित्याक ठुल हस्ताक्षर छन।उनुकें स्पर्श करि बेर उनरि साहित्य गंगा में अवगाहन करण जस कस साहित्यकारकि बसै बात नि भै। डाॅ जगदीश पन्त ज्यू एक प्रतिभाशाली व्यक्तित्व छन।

उनुल यै हैबेर पैली एक किताब और अनेकों लेख व फीचर प्रस्तुत करि राखी। राजभाषा राष्ट्रीय एकता का सूत्र हैं। जसि रचनाओं पर उनुकैं अनेकों सम्मान व पुरस्कार प्राप्त छन। खाद्य निगम में नौकरी करते हुए उनूकें राजभाषा में विशेष हिन्दी कार्यशालाओंक संचालन और प्रतिभाग करणक सौभाग्य प्राप्त भौ। रचनाधर्मिता कैं अघिल ल्हिजाण में पन्त ज्यू कैं धर्मपत्नी चंद्र्रकला पन्त क लै भरपूर सहयोग मिलूॅ। पन्त ज्यूल कुमाउनी भाषा विकास दगाड़ हिन्दी में सेवा करणी साहित्यकारोंकि बिरादरी में आपण नौ लेखै हालौ।यौ उनरि उल्लेखनीय उपलब्धि छु। सुदामा पाडंे धूमिल के काव्य में सामाजिक यथार्थ एक पढ़ण लैक और संग्रह करण लैक ठुलि किताब छु। जस किताबक नौ छु उसे उमें सामाजिक बिद्रूपताओं और सरोकारोंक यथार्थ अैार मार्मिक वर्णन करी रौ।संस्कृति विभाग उत्तराखंडक आर्थिक सहयोगल प्रकाशित य किताब ड़ाॅ जगदीश पन्त ज्यूकि सारस्वत साधनाकि एक ठुलि उपलब्धि मानी जालि।
समीक्षक-दामोदर जोशी ‘देवांशु‘
खेड़ा (काठगोदाम) हल्द्वानी (नैनीताल)
मो0 9719247882

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