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उत्तराखण्ड

19वीं पुण्यतिथि पर याद किये गये राजनेता व साहित्यकार डॉ.शिवानंद नौटियाल

देहरादून/लखनऊ/कर्णप्रयाग। उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ राजनेता स्व. डॉ. शिवानन्द नौटियाल की पुण्यतिथि उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। स्व.नौटियाल के उत्तराखंड स्थित पैतृक गांव कोठला सैंजी में उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर सभी ने याद किया। उत्तराखंड के कर्णप्रयाग और पौड़ी गढ़वाल जिले में उनकी याद में श्रद्धाजंलि सभा का आयोजन कर उनके कृत्तित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्व. नौटियाल की स्मृति में एक सभा का आयोजन हुआ। जिसमें स्व. नौटियाल जी के सहयोगी रहे अनेक राजनेता, साहित्याकार व रंगकर्मियों सम्मिलित हुए। गढ़वाल मंडल बहुउद्देशी सहकारी समिति के संस्थापक रहे स्व. नौटियाल जी को याद करते हुए समिति के पदाधिकारियों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किये तथा उनके द्वारा किये गये विकास कार्यों तथा जनकल्याणकारी नीतियों की चर्चा की।

लखनऊ स्थित उत्तरांचल रत्न डा. शिवानंद नौटियाल फाउंडेशन के कार्यालय में भी स्व. शिवानंद नौटियाल की पुण्यतिथि पर एक शोक सभा का आयोजन किया किया। जिसमें कई वरिष्ठ राजनेता, साहित्यकार के साथ-साथ स्व. नौटियाल के परिवार के सदस्यों ने भाग लिया तथा अपने-अपने विचार व्यक्त किये। इस सभा का आयोजन स्व. नौटियाल के पुत्र व उत्तराखंड राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष दिव्य नौटियाल ने किया। डॉ. नौटियाल जी के पुत्र विवेक नौटियाल ने उनके व्यक्तित्तव एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। नौटियाल जी के ज्येष्ठ पुत्र कमल नौटियाल ने सभा में आये सभी लोगों का आभार प्रगट किया।

डॉ. शिवानंद नौटियाल : जीवन परिचय
दो बार पौड़ी और छह बार कर्णप्रयाग के विधायक रहे डॉ. शिवानंद नौटियाल की आज पुण्य तिथि है। लखनऊ, देहरादून और कर्णप्रयाग सहित विभिन्न स्थानों उनकी याद में श्रद्धाजंलि सभा का आयोजन कर उनकी स्मृतियों को याद किया गया।

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शिक्षा, साहित्य और राजनीति के क्षेत्र में ख्यातिलब्ध शिवानंद नौटियाल जी का जन्म 26 जून 1926 को पौड़ी जनपद के ग्राम कोटला में हुआ था। सन् 1967 में इन्होंने सक्रिय राजनीति में पदार्पण किया। 1969 में पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र से विधायक बनने का अवसर मिला। वर्ष 1974 तथा 1979 के विधानसभा चुनावों में भी वह पुन: निर्वाचित हुए। डॉ़. नौटियाल को दो बार पौड़ी सीट से और कर्णप्रयाग से छह बार विधायक बनने का अवसर मिला।

1979 में डॉ. नौटियाल को उत्तर प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा एवं पर्वतीय विकास मंत्रालय का दायित्व सौंपा गया। इन्होंने अपने मंत्रित्वकाल में संपूर्ण उत्तराखंड क्षेत्र में विद्यालयों को प्रोन्नत करने के साथ साथ विद्यालयों की स्थापना में महती भूमिका निभाई ।

नौटियाल जी एक कुशल राजनीतिज्ञ, औजस्वी वक्ता के साथ सफल साहित्यकार भी थे। इनका शोध पत्रबंध- गढ़वाल के लोकनृत्य गीत है। इसमें गढ़वाली लोकसाहित्य के सभी रूपों को विस्तार से वर्णित किया गया है। गढ़वाली लोकमानस, गढ़वाल के नृत्य, गढ़वाल के लोकगीत, गढ़वाल के खुदेड़ गीत, गढ़वाल के नृत्य गीत, छम घुंघरू बाजला, नेफा की लोककथाएं, कुमाऊं दर्शन, बदरी केदार की ओर इनकी श्रेष्ठ शोधात्मक रचनाएं हैं। नौटियाल को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी नामित पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

वह लगातार राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय रहे। वर्ष 2004 में निमोनिया होने के कारण उन्हें लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती किया गया। जहां दो अप्रैल 2004 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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