आठ दिवसीय उत्तरायणी मेला, घुघुतिया त्यार का आगाज

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आठ दिवसीय उत्तरायणी महोत्सव में इस बार भी कुमाऊंनी संस्कृति से ओतप्रोत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच के अध्यक्ष डॉ चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि ‘हमारी संस्कृति हमारी पहचान को महत्व देते हुए कुमाऊनी बोली एवं संस्कृति, रीति रिवाज विलुप्त न हो इसके लिए इस मेले को हर साल परम्परागत तरीके से बढ़ावा दिया जाता है। हमारी नई पीढ़ी को भी हमारी रीति-रिवाजों और कुमाऊंनी संस्कृति से रूबरू कराने के लिए मेले का विशेष महत्व है।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए डॉक्टर तिवारी ने बताया कि इस बार भी मेले में विशेषकर महिला समूहों को महत्व देते हुए अधिकांश स्टॉल महिलाओं को दिए गए हैं उन्होंने सभी से अनुरोध करते हुए यह भी कहा है कि मेले में कोविड-19 का पालन करते हुए इसका आनंद उठाएं।

मंच के कोषाध्यक्ष एन बी गुणवंत ने कहा कि अधिकांश लोगों को आज अपनी संस्कृति रीति-रिवाजों को समझना चाहिए आठ दिवसीय इस कार्यक्रम में संपूर्ण तरीके से कुमाऊनी बोली पर ही महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

मेले के प्रथम दिन गोलजू पूजन एवं आरती का आयोजन किया जाएगा 9 जनवरी को प्रातः 11:00 बजे से मेले का उदघाटनन होगा और 15 जनवरी तक प्रतिदिन सायंकाल सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पत्रकार वार्ता के दौरान मंच के संरक्षक भुवन जोशी,अध्यक्ष डॉ चंद्र शेखर तिवारी, मुकेश शर्मा, त्रिलोक बनौली, पूरन भंडारी, हेमचंद भट्ट, स्मित तिवारी, ललित बिष्ट, पुष्पा संभल, विपिन बिष्ट, देवेंद्र तोलिया, भोपाल बिष्ट आदि मौजूद थे।

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