कुमाऊं का प्रसिद्ध मंदिर शिखर-भनार, किलसात कौतिक,एक नजर

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बागेश्वर जिले के कपकोट भनार स्थित बंजैण, शिखर मूलनारायण मंदिर में कौतिक त्रियोदशी से शुरू हो गया है।तदोपरांत यह मेला 8 नवंबर कार्तिक पूर्णिमा के दिन दशौली स्थित किलसात नौलिंग मंदिर में भी धूमधाम से मनाया जाता है। 6 नवम्बर को बंजैण देवता मंदिर 7,8 को मूलनारायन शिखर में भी श्रद्धालुओं की खूब भीड़ रहती है।

कपकोट शिखर भनार में कौतिक आज भी पारम्परिक तरीके से मनाया जाता है। यहां कुमाऊं के प्रसिद्ध ढोल नगाड़े व अन्य वाद्य यंत्रों के साथ मेला होता है। कौतिक को देखने के लिए उत्तराखंड राज्य के अलग अलग जगहों से भक्तजन यहां पहुँचते हैं। यही नहीं देश के विभिन्न राज्यों में रह रहे उत्तराखंड प्रवासी भी मेले के दिन यहां पहुँच जाते हैं। शिखर, भनार, सनिगाड़ मंदिर के दर्शन करने अकसर भक्तजन आते रहते हैं। परंतु मेले के दौरान यहां खूब चहल पहल रहती है।

इस दौरान पारंपरिक लोकगीतों के कलाकार भी यहां आते हैं। कौतिक उत्तराखंड राज्य के पलायन की रोकथाम के लिए एक धरोहर के तौर पर है। लेकिन समयानुसार बदलाव होना स्वाभाविक है।

समाजिक कार्यकर्ता प्रताप सिंह नेगी ने बताया कुमाऊं व गढ़वाल में ऐसे ही तीन दिवसीय व दो दिवसीय कौतिक होते रहते हैं। लेकिन उत्तराखंड राज्य से पलायन के कारण हमारे उत्तराखंड के कौतिको में धीरे धीरे रौनक कम होते आयी। पहले मेले में हजारों की भीड़ देखने को मिलती थी, लेकिन अब पलायन के चलते लोग कम संख्या में आते हैं।

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