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धामी सरकार के नकल विरोधी कानून को अपना रही मोदी सरकार, जानें पेपर लीक लॉ में क्या-क्या?

पेपर लीक के सख्त कानून पर कैबिनेट बैठक में मुहर लग गई है। आज यानी शुक्रवार को मोदी कैबिनेट की बैठक थी। जिसमें नरेंद्र मोदी सरकार ने बैठक में पेपर लीक रोकने वाले कानून और भी ज्यादा सख्त करने के लिए कानून बनाए है। हालांकि दिलचस्प बात ये है कि इन सख्त प्रावधानों की समानता उत्तराखंड के नकल विरोधी कानून से देखने को मिल रही है। जिसके तहत ये कहा जा सकता है कि मोदी सरकार धामी सरकार के नकल विरोधी कानून को अपना रही है।

पेपर लीक कानून को कैबिनेट से मिली मंजूरी, अगले हफ्ते हो सकते है पेश
दरअसल सरकार ये कह रही है कि वो नीट पेपर लीक को लेकर सख्त है। पीएम पहले ही ये ऐलान कर चुके है कि पेपर लीक के आरोपियों को छोड़ा नहीं जाएगा।

सीजेपी प्रोटेस्ट के बीच मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई। जिसमें पेपर लीक रोकने वाला संशोधित कानून पर विचार किया गया। जिसको कैबिनेट से मंजूरी भी मिल गई। एगले हफ्ते इससे संसद में पेश किया जाएगा। बता दें कि ये कानून मौजूद पेपर लीक कानून का ही पार्ट होगा।

तय सीमा में पेपर लीक मामलों में पूरा हो ट्रायल
सूत्रों की माने तो कैबिनेट बैठक में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट 2024’ में संशोधन पर विचार किया गया। सूत्रों के अनुसार सरकार ने पेपर लीक मामलों में ट्रायल पूरा करने के लिए एक समय-सीमा तय की है। जो कि एक साल और उससे कम की बताई जा रही है। इससे तेजी से मुकदमा चलेगा और दोषियों को जल्द सजा मिलेगी।

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10 साल की जेल, एक करोड़ का जुर्माना
सूत्रों की माने तो नए कानून में पेपर लीक में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को तीन से पांच साल तक की जेल की सजा हो सकती है। तो वहीं 10 लाख का जुर्माना होने की संभावना है। साथ ही संगठित पेपर लीक रैकेट में शामिल लोगों को पांच-दस साल की सजा और कम से कम एक करोड़ का जुर्माना होने की बात कही जा रही है।

धामी सरकार के नकल विरोधी कानून को अपना रही मोदी सरकार
आपको बता दें कि नए पेपर लीक संशोधित कानून में लंबी जेल की सजा, भारी जुर्माना और ट्रायल पूरा करने के लिए अनिवार्य समय-सीमा तय करने आदि प्रस्ताव हैं। दिलचस्प बात ये है कि इन सख्त प्रावधानों की समानता उत्तराखंड के नकल विरोधी कानून से देखने को मिल रही है। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लागू किए गए नकल विरोधी कानून में भी पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में धांधली करने वालों के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान किया गया था।

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