काठगोदाम- हेड़ाखान रोड को लेकर राजनीति, सड़क सुधारीकरण के नाम पर पेड़ कटान व मिट्टी उठाने की कवायद

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हल्द्वानी। काठगोदाम- हेड़ाखान की सड़क टूटकर बंद होने के बाद राजनीति गरमाने लग गई है। इससे जहां स्थानीय लोगों को आवाजाही में भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है वहीं सड़क टूटने के बाद कुछ लोगों को पेड़ गिराने, काटने तथा मिट्टी धुलाई का सही मौका मिल गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क को खोलने के बाद इसमें जेसीबी से बड़े-बड़े गड्ढे खोदकर क्यों छोड़ दिया गया। फिर 2 दिन बाद उन्हीं गड्ढों को भर दिया। आखिर यह सब किसके इशारे पर हो रहा है। क्या लोक निर्माण विभाग ठोस निर्णय नहीं ले पा रहा है या इसके पीछे कोई और वजह है। चर्चा है कि कुछ भू- माफियाओं की नजर वहां पड़े मिट्टी के ढेर पर है। कुछ पेड़ गिराकर मौके का लाभ उठाना चाहते हैं। इस प्रकार के कई सवाल यहां के गांव के निवासियों के मन को विचलित कर रहे हैं। आखिर प्रशासन अपरिपक्व निर्णय क्यों ले रहा है। इस सड़क के बंद होने से रौसिला और हेड़ाखान के बीच पड़ने वाले दर्जनों गांव वासियों के साथ साथ ओखल कांडा और चंपावत जिले को जोड़ने वाले मार्ग की आवाजाही ठप हो गई है। इस मार्ग को खोलने और बंद करने के निर्णय से लोग आहत है। लोग दबी जबान से नेताओं को भी कोस रहे हैं जहां एक तरफ जमरानी से रौसिला होते हुए जो मार्ग खोल दिया गया है वह भी जान जोखिम में डालने वाला मार्ग बना हुआ है, कहीं पर खड़ी चलाई है तो कहीं कीचड़ का दलदल है जिसमें कई दुपहिया वाहन सवार चोटिल हो चुके हैं।

गाड़ियों के पलटने का भी डर बना हुआ है। जिस कारण ओखलकांडा और चंपावत जाने वाले यात्रियों को और नौकरी पेशा लोगों को धारी, धानाचुली, ओखलकांडा होते हुए चंपावत जाना पड़ रहा है। जो महंगा होने के साथ-साथ लंबा सफर भी है। जिसमें लोग काफी परेशानी का सामना कर रहे हैं। चंपावत और ओखलकांडा से माल्टा, नींबू और सब्जी मंडी पहुंचाने वाले काश्तकारों की लागत बढ़ने के साथ-साथ परेशानी भी बढ़ गई है। काठगोदाम से ऊपर जिस पहाड़ी पर भूस्खलन हुआ है अगर उस पहाड़ी से हेड़ाखान को रास्ता नहीं बनाया जाता है या कोई अन्य रास्ता इसके अतिरिक्त नहीं बनाया जाता है तो हेड़ाखान और रौसीला के बीच पढ़ने वाले दर्जनों गांव को हल्द्वानी आने-जाने और राशन आदि सामान लाने और साग सब्जी को हल्द्वानी पहुंचाने में मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि यथाशीघ्र इस मार्ग को नहीं खोला गया तो दर्जनों ग्रामीणों के साथ हल्द्वानी में धरना दिया जाएगा।

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इधर काठगोदाम से ऊपर जो भूस्खलन से रूट प्रभावित हुई है वहां पर जो मिट्टी का मलवा है उसको बेचकर कुछ लोग मोटा मुनाफा कमाना चाहते हैं, इसलिए वहां पर लगी प्राइवेट जेसीबी वालों की पैरवी में उतरकर उस मालवे को हटाकर उसी के द्वारा खर्च किए गए हिसाब में एडजस्ट करने की बात कर रहे हैं। जंगलात के अधिकारी इसको जंगलात की संपत्ति बता कर बेचने से इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि इसे सुरक्षित एक जगह पर डंप किया जाएगा। ऐसा प्रतीत होता है कि सारा खेल जो इस रोड को बीचोंबीच खोदा गया था और फिर गहरे गड्ढे बना कर छोड़ दिया गया था और अब दोबारा उबड़ खाबड़ बना कर छोड़ दिया गया है। वह कहीं न कहीं कोई साजिश का हिस्सा है।

स्थानीय ग्रामीणों का भी कहना है कि जिस दिन इस रोड में बड़े गड्ढे किए गए थे उसी रात यहां कुछ अवैध काम भी हुए थे उन कामों पर पर्दा डालने के लिए ही गड्ढे खोदे गए और फिर कुछ अधिकारियों पर दबाव डालकर रोड पर आवाजाही को खतरा बताकर मीडिया में प्रसारित किया गया। जहां भूस्खलन हुआ है वहां पर काफी मात्रा में मिट्टी डंप हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां पर डंप हो चुकी मिट्टी पर कुछ भू माफियाओं की नजर है और वह इसे बेचकर मोटा मुनाफा कमाना चाहते है।

रिपोर्ट-शंकर फुलारा

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