प्रदेश में राजस्व पुलिस व्यवस्था समाप्त करने की कवायद, प्रथम चरण में 1200 गांवों से हट जायेगी व्यवस्था, कुमाऊं में बढ़ेंगे तीन थाने व आठ चौकियां

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हल्द्वानी। उत्तराखंड में अब 1200 गांवों से राजस्व पुलिस व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। इसके साथ ही कुमाऊं में 3 नए थाने और 8 चौकियां खुलेंगे। प्रदेश सरकार ने सैद्धांतिक निर्णय लेते हुए संवेदनशील इलाकों में राजस्व पुलिस व्यवस्था को खत्म करने का निर्णय लिया है।

विदित हो कि धामी कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय के बाद प्रदेश में 6 नए थाने और 20 चौकी खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। संपूर्ण राजस्व क्षेत्र में कानून व्यवस्था का काम रेगुलर पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा। कुमाऊं में नए थाने और चौकी खुल जाने के बाद लगभग 1200 गांव राजस्व पुलिस से हट जाएंगे। पिछले दिनों राजस्व पुलिस क्षेत्र में हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद प्रदेश में राजस्व पुलिस व्यवस्था पर तमाम सवाल खड़े होने लगे थे। इसलिए राजस्व पुलिस व्यवस्था समाप्त करने की मांग पर सरकार द्वारा निर्णय लिया गया।

बुधवार को हुई देहरादून में हुई कैबिनेट बैठक में इस पर मंथन हुआ और कैबिनेट ने राजस्व पुलिस व्यवस्था को समाप्त करने की सैद्धांतिक सहमति दी। साथ ही राजस्व क्षेत्र में 6 थाने और 20 चौकी खोलने की मंजूरी दी गई। प्रथम चरण में ऐसे क्षेत्र रेगुलर पुलिस को दिए गए हैं जहां पर्यटन अथवा व्यवसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में मौजूदा थाने चौकियों का सीमा विस्तार भी किया जाएगा अब गृह विभाग थाने और चौकियों के गठन और शामिल होने वाले गांव के संबंध में विधिवत रूप से अधिसूचना जारी करेगा। आपको बता दें कि ब्रिटिश कालीन से ही राजस्व पुलिस व्यवस्था यानी 1861 से चल रही है। इसके तहत पटवारी, लेखपाल,कानूनगो अपराध होने की स्थिति में ना सिर्फ केस दर्ज करता है बल्कि उसकी जांच भी करता है। जानकारों के मुताबिक दोहरी पुलिस व्यवस्था वाला उत्तराखंड अब एकमात्र राज्य है,यही नहीं राज्य के 61 प्रतिशत हिस्सा राजस्व पुलिस के अधीन है इसके सापेक्ष संसाधन न होने के कारण राजस्व पुलिस व्यवस्था नाम मात्र के लिए ही रह गई है। राजस्व क्षेत्र में बड़ी घटना होने पर सामान्य तौर पर मामला रेगुलर पुलिस को ही सौंपा दिया जाता है। ऐसे में उत्तराखंड राजस्व पुलिस व्यवस्था को प्रभावी करार देते हुए हाई कोर्ट भी 2018 में सरकार को राजस्व क्षेत्र की कानून व्यवस्था रेगुलर पुलिस को सौंपने का आदेश दे चुका है, तब सरकार ने इसे वित्तीय वजह से मुश्किल बताते हुए फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर दी थी। एसीएम राधा रतूड़ी के मुताबिक अभी इस केस में सुप्रीम कोर्ट में विशेष प्रगति नहीं हुई है। अलबत्ता हाईकोर्ट में भी इस बारे में एक और केस चल रहा है जहां सरकार मौजूदा कैबिनेट निर्णय की जानकारी देगी।

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सूत्रों के अनुसार सरकार अब सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस लेने की तैयारी कर सकती है। कुमाऊं मंडल में नई व्यवस्था के तहत 3 नए थाने खुलेंगे। इसके साथ ही 8 नई पुलिस चौकी भी अस्तित्व में आ जाएंगी। जिसमें नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर और भीमताल थाने की सीमा से लगे खनस्यु में थाना खोलने का प्रस्ताव है। अल्मोड़ा जिले में देगा और धौलछीना थाना प्रस्तावित है। इसी तरह ओखल कांडा, धानाचुली हेड़ाखान, नारी में पुलिस चौकी बनाने का प्रस्ताव है। अल्मोड़ा जिले में मौलेखाल, मचखाली, जागेश्वर तथा चंपावत जिले में बाराकोट पुलिस चौकी का प्रस्ताव रखा गया है। डीआईजी डॉ नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि थाने और चौकियों के अधीन 12 00 गांव शामिल किए जाएंगे।

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