उत्तराखंड के पारंपरिक पर्व, त्यौहार होते जा रहे लुप्त: नेगी

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अल्मोड़ा। श्रावण पूर्णिमा के दिन प्राचीन काल से ही जनेऊ, पुंनयू के दिन ब्राह्मणों द्बारा बनाये गई जनेऊ व रक्षा तागा हर जजमान को पहनाया जाता था। लेकिन पिछले 30-40 साल से उत्तराखंड के राजपूत व ब्रहामण लोग अपने कपास की खेती के द्धारा एक महिने पहले से अपने हाथों से लट्टू के सहारे जनेऊ का तागा बनाया करते थे। उस तागे से बडे बुजुर्ग छै पल्ली व तीन पल्ली जनेऊ बनाकर तैयार करते थे। ठीक श्रावन पूर्णिमा के दिन अपने अपने गांव से राजपूत ठाकुर व अपने अपने गांव ब्रह्ममण लोग सुबह सुबह आस पास के नदियों के किनारे अपने अपने पंडितों के साथ घाट स्नान कर जनेऊ प्रतिष्ठित किया करते थे, तदपाश्चत पंडित के द्बारा उन लोगों को जनेऊ व रक्षा तागा पहनाया जाता था।

सामाजिक कार्यकर्ता प्रताप सिंह नेगी ने बताया उत्तराखंड राज्य में यह पारंपरिक पर्वों का धीरे धीरे पतन होने लगा है। वर्तमान समय में परंपरागत तरीके की रीति रिवाज बहुत कम देखने को मिल रही है। नेगी ने बताया उत्तराखंड की पारंपरिक पर्वो व धार्मिक त्यौहारों में दिन प्रतिदिन गिरावट आ रही है।

हर राज्य की अपनी अलग-अलग संस्कृति होती है ऐसे ही हमारी उत्तराखंड की एक पारंपरिक पर्वों की रीति रिवाज संस्कृति का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा उत्तराखंड राज्य से पलायन के बाद उत्तराखंड की तिथि तौयहार व पारंपरिक व धार्मिक त्यौहारों में गिरावट आ रही है।