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उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन की मुश्किलें बढ़ीं, नवंबर 2026 तक चुनाव कराने की चुनौती

उत्तराखंड राज्य फुटबॉल एसोसिएशन की 20 दिसंबर के बाद चुनाव कराने की योजना नाकाम हो गई है। राज्य फुटबॉल एसोसिएशन ने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) को बताया था कि उनके चुनाव अगले साल होने हैं।
AIFF ने नवंबर तक चुनाव कराने का दिया विकल्प
AIFF ने दस्तावेजों की जांच करने के बजाय उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन की बातों पर भरोसा कर लिया। लेकिन, देहरादून से आई एक शिकायत ने उत्तराखंड राज्य फुटबॉल एसोसिएशन की पोल खोल दी। अब उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन के पास करवाल ये विकल्प बचा है कि या तो तो फिर नवंबर 2026 में चुनाव पूरे करने होंगे। अगर उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन ऐसा करने में नाकाम रहता है, तो वे 20 दिसंबर को होने वाले AIFF चुनावों में वोट डालने के योग्य नहीं होंगे।
2018 में हुए थे आखिर बार चुनाव
ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन की धारा 26.2 में स्पष्ट रूप से कहा गया है, “कार्यकारी समिति (एग्जीक्यूटिव कमिटी) का कार्यकाल 4 (चार) वर्ष का होगा।” बता दें उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन के चुनाव 2007 में 11 अगस्त को और 2011 में 7 अगस्त को हुए थे। लेकिन 2014 में, चुनाव दो महीने की देरी से 19 अक्टूबर को हुए। यही सिलसिला 2018 में भी जारी रहा और चुनाव 21 अक्टूबर को हुए। 2026 में, उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन के चुनाव 2 दिसंबर को हुए।
नक्शेदेखें
इससे साफ पता चलता है कि 2014 में उत्तराखंड राज्य फुटबॉल एसोसिएशन ने अपना कार्यकाल खत्म होने के दो महीने बाद चुनाव कराए। उन्होंने 2018 में भी यही किया। 2022 में भी चुनाव कार्यकाल खत्म होने के दो महीने बाद कराए गए। यह AIFF के उस नियम का उल्लंघन है, जिसके तहत कार्यकाल अधिकतम चार वर्ष का ही हो सकता है। उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन चुनाव क्यों टालना चाहता था? इसके पीछे संभवतः यह कारण हो सकता है कि वे 20 दिसंबर को होने वाले ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन के चुनावों में वोट डाल सकें और इस ‘मदद’ के बदले अनुचित समर्थन हासिल कर सकें।





