उत्तराखंड में लागू होगी नई राजस्व संहिता, परिषद ने ड्राफ्ट तैयार कर शासन को सौंपा

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वर्तमान में उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम) 1950 और भू राजस्व अधिनियम लागू हैं। इसके अलावा कुछ अन्य अधिनियम भी प्रचलन में हैं।

यह सभी अधिनियम उत्तर प्रदेश से धारण किए गए हैं।समय-समय पर इनमें जरूरत के हिसाब से कुछ उप धाराएं जोड़ी गईं, लेकिन राज्य का पूर्ण रूप से अपना रेवेन्यु कोड नहीं बन पाया। जबकि यूपी ने इन्हें समाप्त करते हुए अपना रेवेन्यु कोड वर्ष 2013 में लागू कर दिया था। अब प्रदेश में लागू सभी अधिनियम को मर्ज करते हुए अपना रेवेन्यु कोड तैयार किया जाएगा।
अब राज्य की परिस्थितियों के हिसाब से नया एक्ट बनाए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इस पर पिछले दो साल से काम चल रहा था। राजस्व परिषद की ओर से पूरा ड्राफ्ट तैयार कर शासन को सौंप दिया गया है। जिस पर विधि समिति की ओर से निर्णय लिया जाएगा।
22 सितंबर को होगी विधि समिति की बैठक
राजस्व परिषद की ओर से तैयार किए गए रेवेन्यु कोड पर चर्चा के लिए विधि समिति की बैठक इससे पहले दो बार स्थगित हो चुकी है। पहले यह बैठक पांच सितंबर को बुलाई गई थी। लेकिन किन्हीं कारणों से बैठक नहीं हो पाई। इसके बाद 14 और 15 सितंबर को लगातार दो दिन बैठक होनी थी, लेकिन समिति के कुछ सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण एक बार फिर बैठक स्थगित हो गई। अब यह बैठक 22 सितंबर को होनी है। सचिव राजस्व परिषद ने इसकी पुष्टि की है।

उत्तराखंड में भी राज्य की परिस्थितियों के हिसाब से नया एक्ट बनाए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इस पर पिछले दो साल से काम चल रहा था। अब राजस्व परिषद की ओर से ड्राफ्ट तैयार कर शासन को सौंप दिया गया है। अब शासन की विधि समिति को इस पर विचार करना है। किन्हीं कारणों से समिति की दो बार बैठक स्थगित हो चुकी है। समिति की ओर से ड्राफ्ट पर विचार करने के बाद इसे कैबिनेट में रखा जाएगा। कैबिनेट से पास होने के बाद यह विधानसभा में जाएगा। जहां से पास होने के बाद यह कानून की शक्ल ले लेगा।मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली विधि समिति की बैठक में प्रमुख सचिव न्याय एवं विधि, सदस्य (न्यायिक) राजस्व परिषद, सचिव राजस्व विभाग, सचिव वित्त, महाधिवक्ता उत्तराखंड शासन, आयुक्त गढ़वाल एवं कुमाऊं, नामित सदस्य अरुण कुमार सक्सेना और सुबोध कुमार शर्मा मौजूद रहेंगे।