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हल्द्वानी और काठगोदाम डिपो की छह बीएस-4 बसें दिल्ली रूट से बाहर

हल्द्वानी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और दिल्ली सरकार के कड़े दिशानिर्देशों का सीधा असर उत्तराखंड परिवहन निगम की सेवाओं पर दिखने लगा है। दिल्ली में बीएस-4 (भारत स्टेज-4) डीजल वाहनों के प्रवेश पर लगी पाबंदियों के अनुपालन में उत्तराखंड परिवहन निगम ने कुमाऊं क्षेत्र से दिल्ली जाने वाली बीएस-4 मानक की बसों का संचालन तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। इस नए आदेश के तहत हल्द्वानी डिपो के बेड़े में शामिल 25 बसों में से एक बस, जबकि काठगोदाम डिपो की 24 बसों में से पांच बसों को दिल्ली मार्ग से हटा दिया गया है। हल्द्वानी डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) संजय पांडे के अनुसार, निगम मुख्यालय के उच्चाधिकारियों से दूरभाष पर मिले कड़े निर्देशों के बाद बीती गुरुवार से ही इन सभी छह बसों के संचालन को दिल्ली रूट पर पूरी तरह बंद कर दिया गया। अब दिल्ली के लिए केवल बीएस-6 मानक वाली और सीएनजी बसें ही संचालित की जा रही हैं, ताकि राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश के दौरान चालान या जब्ती जैसी कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके。परिवहन निगम ने यात्रियों की सुविधा और राजस्व के संतुलन को बनाए रखने के लिए इन प्रभावित बसों को पूरी तरह से डिपो में खड़ा करने के बजाय अन्य वैकल्पिक मार्गों पर तैनात करने का फैसला किया है। अब इन बीएस-4 बसों को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के भीतर उन शहरों के लिए रवाना किया जा रहा है जहां उत्सर्जन मानकों को लेकर इस प्रकार की सख्त पाबंदियां लागू नहीं हैं। इनमें मुख्य रूप से सहारनपुर, ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून जैसे प्रमुख रूट शामिल हैं।
बदलते मार्ग और सेवाएँ
हालांकि डिपो प्रबंधन का दावा है कि दिल्ली मार्ग पर यात्रियों के आवागमन में कोई बाधा नहीं आएगी और शेष बीएस-6 बसों के फेरे व्यवस्थित करके सेवाओं को सुचारू रखा जाएगा, लेकिन ऐन वक्त पर रूट बदलने से अन्य स्थानीय मार्गों पर बस संचालन का दायरा जरूर बढ़ा है। विभाग अब अपने बेड़े को पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल और बीएस-6 मानकों में अपग्रेड करने की प्रक्रिया को तेज करने पर विचार कर रहा है ताकि भविष्य में अंतरराज्यीय सेवाओं में किसी प्रकार का व्यवधान न आए।






