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हल्द्वानी -नैनीताल जिले में SIR की प्रक्रिया पूरी,कल आएगी फाइनल वोटर लिस्ट

उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के आखिरी चरण के तहत दावे और आपत्तियों की सुनवाई पूरी कर ली गई है। निर्वाचन आयोग 3 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी करने जा रहा है। नैनीताल जिले में प्री-SIR चरण में करीब 71 हजार मतदाता इस प्रक्रिया के दायरे में आए थे। अब अंतिम सूची तैयार हो चुकी है।

नैनीताल जिले में SIR के तहत कुल 69 हजार 3325 मतदाता ड्राफ्ट सूची में दर्ज हैं। दावे-आपत्तियों के निस्तारण के दौरान बड़ी संख्या में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन के आवेदन आए।

नाम जोड़ने के लिए 17 हजार आवेदन

प्रारूप-6 के तहत नाम जोड़ने के लिए कुल 17 हजार 043 आवेदन प्राप्त हुए। जांच के बाद इनमें से 11 हजार 477 नए नाम मतदाता सूची में शामिल किए गए, जबकि 1 हजार 144 आवेदन निरस्त कर दिए गए। वहीं, 4,422 आवेदन 14 अगस्त की तय समय सीमा के बाद प्राप्त हुए थे।

नाम हटाने के लिए आए 18,946 आवेदन

प्रारूप-7 के तहत नाम हटाने के लिए कुल 18,946 आवेदन मिले। इनमें से 7,919 नाम सूची से हटाए गए, जबकि 10,986 आवेदन खारिज कर दिए गए। प्रारूप-8 के तहत मतदाता विवरण में संशोधन के लिए 7,782 आवेदन मिले। इनमें से 5,887 आवेदनों में संशोधन किया गया, जबकि 437 आवेदन निरस्त हुए।

सुनवाई में नहीं पहुंचे तो नाम अयोग्य चिह्नित

निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से मांगे गए जरूरी दस्तावेज जमा नहीं कराए। कई मामलों में नोटिस जारी होने के बावजूद मतदाता या उनके परिवार का कोई प्रतिनिधि सुनवाई में शामिल नहीं हुआ।

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ऐसी स्थिति में संबंधित ERO और AERO ने ECI NET पोर्टल पर संबंधित मतदाताओं को ‘इन-एलिजिबल’ यानी अयोग्य के तौर पर चिह्नित किया। इसके बाद सिस्टम के माध्यम से फॉर्म-7 जनरेट हुआ और नाम विलोपन की प्रक्रिया में चले गए।
3 अक्टूबर के बाद फिर जुड़वा सकेंगे नाम

अधिकारियों के मुताबिक, जिन लोगों के नाम SIR प्रक्रिया में हटाए गए हैं, वे अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद दोबारा फॉर्म-6 के जरिए नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए भारत निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित वैध दस्तावेज जमा करने होंगे।

SIR को लेकर देशभर में राजनीतिक दलों के बीच भी बहस चल रही है। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि नामों का सत्यापन निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया है।

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