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त्योहारी सीजन में खाकी की मनमानी से पहाड़ की आपूर्ति ठप

त्योहारी सीजन के मुहाने पर खड़े कुमाऊं मंडल के लिए एक बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। पुलिस प्रशासन की बेतरतीब कार्यप्रणाली और मनमाने रवैये के चलते पर्वतीय क्षेत्रों को जोड़ने वाली लाइफलाइन लड़खड़ा गई है। हालात यह हैं कि ऐन त्योहारी सीजन में पहाड़ों पर जरूरी सामानों की आपूर्ति पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गई है, जिससे व्यापारियों और आम जनता दोनों में भारी आक्रोश है। शनिवार को आयोजित ट्रांसपोर्टरों की एक आपातकालीन बैठक में पुलिसिया उत्पीड़न और तानाशाही के खिलाफ तीखा आक्रोश देखने को मिला। ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेताओं ने दो टूक आरोप लगाया कि पर्वतीय रूटों पर सामान लेकर जाने वाले ट्रकों को पुलिस प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व गाइडलाइन या ठोस व्यवस्था के जगह-जगह बेवजह रोककर किनारे खड़ा कराया जा रहा है। रानीबाग, काठगोदाम और भवाली जैसे संवेदनशील और मुख्य ट्रांजिट प्वाइंट्स पर ट्रकों की आवाजाही को मनमाने ढंग से बाधित किया जा रहा है, जिससे पूरा माल सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गया है।इस प्रशासनिक अव्यवस्था का सबसे भारी खामियाजा पर्वतीय जिलों के बाजारों को भुगतना पड़ रहा है। अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नैनीताल, गंगोलीहाट, थल और धारचूला जैसे सुदूर पहाड़ी इलाकों से व्यापारियों के लगातार फोन आ रहे हैं। त्योहारी सीजन के मद्देनजर मंगाई गई जीवनरक्षक दवाइयां, रोजमर्रा का राशन और त्योहार से जुड़ी तमाम जरूरी और संवेदनशील वस्तुएं समय पर गंत्वय तक नहीं पहुंच पा रही हैं। जो सफर तय करने में पहले महज दो दिन का समय लगता था, पुलिसिया बैरियरों और रोक-टोक के चलते अब उसमें हफ्ता भर लग रहा है।

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ट्रांसपोर्टरों की बढ़ती मुश्किलें
ट्रांसपोर्टरों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि जब कोरोना महामारी के खौफनाक दौर में सब कुछ पूरी तरह ठप था और लोग घरों में कैद थे, तब इन्हीं ट्रांसपोर्टरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर और विशेष परमिट लेकर दिन-रात मेहनत कर पहाड़ के हर कोने तक जरूरी सामान पहुंचाया था। लेकिन आज त्योहारी सीजन आते ही प्रशासन सारा कसूर और दबाव उन्हीं पर थोप रहा है। अधिकांश ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियां बैंकों की भारी-भरकम किस्तों पर चल रही हैं। पूरे साल भर में यही 10 से 15 दिन उनके लिए कमाई का ‘पीक सीजन’ होते हैं, जिसमें सालभर का घाटा पूरा होता है। ऐसे में पुलिस की यह मनमानी उनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ने का काम कर रही है।

इसके साथ ही, ट्रकों को रोके जाने के कारण ड्राइवरों और सपोर्टिंग स्टाफ का दैनिक खर्च बेहिसाब बढ़ गया है। ऊपर से मौसम का मिजाज बिगड़ते ही खुले आसमान के नीचे खड़ी गाड़ियों में लदा सामान भीगने और खराब होने के मंडराते खतरे का जोखिम भी ट्रांसपोर्टर को ही उठाना पड़ रहा है।

चक्का जाम की चेतावनी
प्रशासन को अल्टीमेटम: चक्का जाम की चेतावनी

गुस्साए ट्रांसपोर्टरों ने साफ कर दिया है कि वे इस मनमानी को और बर्दाश्त नहीं करेंगे। वे जल्द ही जिले के पुलिस कप्तान से मिलकर अपनी इस गंभीर व्यथा को रखेंगे और हस्तक्षेप की मांग करेंगे। ट्रांसपोर्ट संगठनों ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस समस्या का कोई ठोस और व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला गया तथा पहाड़ों के लिए गाड़ियों का बेरोकटोक संचालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वे अगले 10 से 15 दिनों के लिए पर्वतीय रूटों पर माल ढुलाई का काम पूरी तरह ठप करने के लिए विवश होंगे। इस आंदोलन और उससे होने वाले प्रशासनिक संकट की संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और पुलिस प्रशासन की होगी। इस मौके पर टीपी नगर व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप सबरवाल, महामंत्री खीमानंद शर्मा, चंद्रशेखर पांडे, इंदर भूटियानी, विमल कांडपाल, मुकेश भट्ट, अनिल बेलवाल, तरुण शाह सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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