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दिल्ली

24 साल बाद कांग्रेस पार्टी को मिला गांधी परिवार से बाहर का अध्यक्ष

दिल्ली। कांग्रेस पार्टी को24 साल बाद गांधी फेमिली से बाहर का अध्यक्ष मिल गया है। वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए हैं। गांधी परिवार के भरोसेमंद माने जाने वाले 80 साल के खड़गे ने शशि थरूर को बड़े अंतर से अध्यक्ष चुनाव में पराजित किया। चुनाव से पहले ही माना जा रहा था कि खड़गे आसानी से चुनाव जीत जाएंगे। 17 अक्तूबर को हुए चुनाव में खड़गे को 7897 वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी शशि थरूर को 1072 वोट मिले। 416 वोट अमान्य कर दिए गए।मल्लिकार्जुन खड़गे का कांग्रेस अध्यक्ष चुना जाना पार्टी में बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। उनके अध्यक्ष बनने के साथ ही गांधी परिवार ने अपने आपको पीछे कर लिया है, जो पिछले 24 सालों से कांग्रेस अध्यक्ष था।

1998 से अब तक सोनिया गांधी ही कांग्रेस अध्यक्ष थीं, जबकि बीच में दो साल के लिए 2017 से 2019 के दौरान राहुल गांधी ने यह पद संभाला था। लोकसभा चुुनाव में हार के बाद राहुल गांधी ने पद से इस्तीफा दे दिया था। यही नहीं तभी उन्होंने साफ कर दिया था कि अब गांधी परिवार से कोई अध्यक्ष नहीं होगा। अंत तक वह इस जिद पर अड़े रहे और फिर चुनाव हुआ, जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे को चुना गया है।

500 डेलीगेट्स ने किया मतों का प्रयोगमिस्त्री ने बताया कि पूरे चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराया गया। पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए हर मतपेटी को उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खोला गया। खोलने से पहले मतपेटियों पर लगी सील भी उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को चेक कराया गया। उनकी संतुष्टि के बाद ही मतपेटी खोल कर उसके मत पत्रों को बाहर निकाला और सबको मिक्स करके मतगणना शुरू की गई।

उन्होंने बताया कि देशभर में 68 मतदान केंद्र बनाए गए थे। आंकड़ों के मुताबिक करीब 9500 लोगों ने अपने वोट का प्रयोग किया।24 साल बाद कांग्रेस को मिलेगा गैर गांधी अध्यक्षकांग्रेस के इतिहास में करीब 24 साल बाद पार्टी की कमान गैर गांधी के हाथों में जा रही है। इससे पहले सीताराम केसरी गैर-गांधी अध्यक्ष रहे थे।

इस बार मुकाबले में पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे और केरल से सांसद शशि थरूर हैं। गांधी परिवार ने इस बार चुनाव से अपनी दूरी बना कर रखी। मतदान से पहले सोनिया गांधी ने संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा था, मैं इस दिन का लंबे समय से इंतजार कर रही थी। वहीं, राहुल गांधी पार्टी के तमाम नेताओं की मान-मनव्वल के बाद भी पार्टी अध्यक्ष का पद स्वीकार करने को तैयार नहीं हुए।

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