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बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए लगे प्लांट ठप, कर्ज तले दबे लोगों ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

प्रदेश में लगातार बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए तीन साल पहले हाइड्रो व सोलर के अलावा दूसरे इंतजाम किए गए थे। लेकिन ये इंतजाम अभी तक बिजली की मांग को पूरा करने में कारगर साबित नहीं हो पाए हैं। ज्यादातर प्लांट बंद हो चुके हैं और इन प्लांट्स के संचालक कर्ज के तले दब चुके हैं।

कर्ज तले दबे लोगों ने ली हाईकोर्ट की शरण
बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने कुछ कदम उठाए थे। हाइड्रो व सोलर के अलावा दूसरे इंतजाम किए गए। पिरूल से बिजली बनाने की योजना भी शुरू की गई। लेकिन कुछ समय बाद ही इन सभी योजनाओं के तहत बने प्लांट ठप हो गए हैं। प्लांट लगाने के लिए लोगों ने लाखों का कर्जा लिया था। अब कर्जे में डूबे प्लांट लगाने वाले लोगों ने अब न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए लगे प्लांट ठप
बता दें कि प्रदेश में लगातार बिजली की मांग बड़ रही है। जिसका इलाज के लिए सरकार ने कई उपाय किए। प्रदेश में चीड़ के पिरूल से हर साल लगने वाली आग को ऊर्जा में बदलने की योजना त्रिवेंद्र सरकार ने शुरू की। इसके तहत 21 प्लांट उरेडा के माध्यम से आवंटित किए गए थे।

जिसमें से केवल छह प्लांट ही स्थापित हुए। शुरू में तो इनसे बिजली का उत्पादन भी हुआ। लेकिन तीन सालों केभीतर ही ये प्लांट अब बंद हो चुके हैं। इन प्लांट को लगाने के लिए लोगों ने लाखों का कर्जा लिया था। कर्ज तले दबे प्लांट लगाने वाले लोगों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे कर्ज तले दबे लोग
तीन सालों में ही प्लांट बंद होने से लोग कर्जे में डूब चुके हैं। बैंक कर्जे की भरपाई के लिए बार-बार प्लांट लगाने वाले लोगों को नोटिस भेज रहा है। ऐसे में प्लांट संचालकों ने हाईकोर्ट की शरण ली है। हालांकि इन प्लांट की व्यवहारिकता देखने को शासन ने जतन किए। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया। प्लांट संचालकों का आरोप है कि सरकार ने आधी-अधूरी तैयारियों के साथ योजना लांच की थी और इसी का नुकसान उन्हें उठाना पड़ रहा है।

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