रक्षाबंधन पर्व पर एकमत हों सनातन धर्मी:पाठक

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अल्मोड़ा । वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य पंडित डा मदन मोहन पाठक ने श्रावणी उपक्रम व रक्षाबंधन पर्व पर एकमत होकर सनातन धर्म ध्वजा के संरक्षकों से विनम्र निवेदन करते हुए कहा कि पंचागकारों में एकरूपता न होने के कारण इस प्रकार की स्थिति बनी है, डॉक्टर पाठक ने सभी पंचांगकारों से एकरूपता लाने के संदर्भ में गुहार लगाई है। क्योंकि कोई भी तीज त्यौहार व्रत पर्व मनाने के लिए शास्त्रीय प्रमाण होना अति आवश्यक है। ज्योतिष शास्त्र के निर्णय लोकोक्तियों या हठधर्मिता से नहीं चलते बल्कि इस शास्त्र के निर्णय प्राचीन ग्रंथों से वर्णित होने से चलते हैं ऐसा नहीं कि यह स्थिति आज ही उत्पन्न हुई हो रही हो,ऐसा अनेक बार हो चुका है। परन्तु कुछ लोग केवल लकीर पीटने के कारण उचित अनुचित का ख्याल नहीं करते हैं यहां कुछ महत्वपूर्ण निर्णय दिए जा रहे हैं जिससे सिद्ध हो जायेगा कि वास्तव में 11 अगस्त को ही रक्षाबंधन मनाया जाएगा।

विषय इस प्रकार है इस वर्ष श्रावणी उपक्रम व रक्षाबंधन को लेकर कुछ पंचांगों में भिन्नता आ गई है वास्तव में श्रावणी उपक्रम दिनांक 11/8/2022 को ही सर्वमान्य है फिर भी सामान्य जनता दिग्भ्रमित हो गई है हर हमेशा ऐसे निर्णय के कारण समाज विभाजित हो जाता है इस वर्ष श्रावणी उपागम एवं रक्षाबंधन के पर्व पर श्रद्धालुओं के मन में अत्यंत भ्रम एवं असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है विशेषकर वह स्थिति केवल कुमाऊं में है क्योंकि अलग अलग पंचागों में एकरूपता का अभाव है हालांकि दिव्य तारा प्रसाद पंचांग के संपादक आचार्य डा रमेश चंद्र जोशी जी हमेशा शुद्ध और परिष्कृत गणना कर पर्वों का शास्त्रीय प्रमाण के साथ निर्णय देते हैं फिर भी इस पर सर्व सम्मति न बनना दुर्भाग्यपूर्ण है डा जोशी ने तो अपना टेलिफोन नंबर तक दिया है ताकि आम आदमी जिसे पंचांग का ज्ञान नहीं है लाभान्वित हो सके।

मित्रों रक्षाबंधन 11 अगस्त 2022 को है कुछ पंचांग में 12 अगस्त को है साथ ही देश के अधिकांश पंचांग में यह पर्व 11 अगस्त को ही है और राजकीय अवकाश भी 11 अगस्त को ही है। यह मीमांसा 12 अगस्त को क्यों नहीं हो सकता श्रावणी उपा कर्म और रक्षाबंधन दिनांक 12 अगस्त 2022 को पूर्णिमा तिथि प्रातः 7:06 तक ही है अर्थात भारतीय स्टैंडर्ड टाइम प्रातः 7:06 तक ही 12 अगस्त को पूर्णमासी है अर्थात तीन घड़ी 25 पल्ला तक ही यह व्याप्त है हालांकि यह उदय व्यापिनी है लेकिन यह सांकल्य पदिता नहीं है क्योंकि यह दो मुहूर्त से भी कम है यथा धर्मसिंधु 1 / 4 के निर्णय से स्पष्ट है कि यहां पूर्णिमा उदय व्यापिनी होते हुए भी सांकल्य पादिता नहीं होने से उपर क्रम व रक्षाबंधन के क्रम में सक्रिय माने पूरे दिन पूर्णिमा माने जाने योग्य नहीं है।

प्रतिपदा में यह कदापि नहीं हो सकती क्योंकि प्रतिपदा में पूर्णमासी श्रावणी उपा क्रम बनाना हास्यास्पद होगा दूसरी ओर उपा क्रम प्रकरण में धर्मसिंधु का निर्णय है कि उदय व्यापिनी पूर्णिमा 6 मुहूर्त से कम हो तो इसे पहले दिन ही ग्रहण करें और स्पष्ट करते हुए धर्मसिंधु कार ने एक वाक्य में ही सभी शाखाओं के लिए स्पष्ट निर्देश दे दिया है यथा जैसे धर्मसिंधु कार ने स्पष्ट कर दिया है कि पूर्णिमा दो मुहूर्त से कम होगी तो सभी यजुर्वेद यों का श्रावण उपक्रम पूर्व दिन में ही होगा वाक्य विशेष विचारणीय है मीमांसा कार ने दो मुहूर्त से कम पूर्णिमा को एक ही श्रेणी में रखा है अतः धर्म सिंधु के उक्त निर्णय अनुसार 12 अगस्त 2022 को पूर्णिमा दो मुहूर्त से कम होने के कारण श्रावणी उपक्रम 11 अगस्त को ही शास्त्र सम्मत है अब कुछ पुरोहित जनों को यह संदेह हो सकता है कि पूर्व दिन में उपक्रम कैसे हो सकता है क्योंकि वहां तो पूरे दिन भद्रा हैं,

इसका उत्तर यह है कि धर्मसिंधु कार जैसे मीमांसा का को यह अवश्य ज्ञात होगा कि पूर्व दिन पूर्णिमा के पूर्वार्ध में भद्रा रहेगी फिर भी उन्होंने पूर्व दिन में उपा क्रम की ही आज्ञा दी है भद्रा की पूर्ण शास्त्री मीमांसा दिनांक 11 अगस्त 2022 को चंद्रमा मकर अस्त है मुहूर्त चिंतामणि 1 / 45 के अनुसार मकरस्त चंद्रमा में भद्रा का वास पाताल लोक में माना गया है पीयूष धारा और मुहूर्त गणपति भोपाल बल्लभ आदि ग्रंथों में भद्रा को स्वर्ग पातालस्त होने पर शुभ माना गया है अब यहां पर देखना है कि आपकी आपात स्थिति में भद्रा ग्रहण है या नहीं और यहां आपात स्थिति आपात स्थिति है या नहीं यद्यपि श्रावणी व फाल्गुनी भद्रा में करने का निषेध है लेकिन शास्त्र की स्पष्ट आज्ञा है कि आपात स्थिति में भद्रा का मुख्य मात्र त्याग कर शेष समस्त भाग पर शुभ कार्य किए जा सकते हैं मुहूर्त प्रकाश में दिनांक 12 अगस्त 2022 को पूर्णिमा निर्धारित परिणाम से कम होने के कारण पूर्व 11 अगस्त 2022 को भद्रा पूर्णमासी में उपक्रम और रक्षाबंधन किया जाना आपात स्थिति में योग्य है यदि पूर्णिमा का क्षय हो जाता तब भी स्थिति होती तब भी भद्रा युक्त पूर्णिमा में ही उपा कर्म और रक्षाबंधन किया जाता, अतः आपात स्थिति में भद्रा के मुख्य मात्र को छोड़कर शेष अवधि में पूर्णमासी श्रावणी उपागम रक्षाबंधन के लिए ग्राही है 11 अगस्त को संपूर्ण भारतवर्ष में भद्रा का मुख्य कारण 5:00 बजे 5:51 के बाद प्रारंभ होगा।

अतः पूर्वाहन 10:39 तक का रक्षाबंधन के लिए ही रहेगा जिसका विश्लेषण श्री तारा प्रसाद पंचांग के पृष्ठ संख्या 39 में किया गया है आपात स्थिति में सदैव भद्रा मुख को छोड़कर होलिका दहन भद्रा में किया जाता है गत वर्ष भी ऐसा ही हुआ है इस प्रकार स्पष्ट है कि 11 अगस्त 2022 को उपक्रम रक्षाबंधन किया जाना पूर्णता शास्त्र सम्मत है राजकीय अवकाश व व्यावहारिक पक्ष रक्षाबंधन राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय पर्व है इसकी तिथि का निर्धारण राष्ट्रीय पंचांगकारो की अनुशंसा पर ही भारत सरकार द्वारा 11 अगस्त 2022 को रखा गया है अतः व्यावहारिक व राष्ट्रीय दृष्टिकोण से सभी 11 अगस्त 2022 को रक्षाबंधन व श्रावण उपक्रम मनाए यही प्रतीत होता है । संवत 2073 ,2086 ,2088 ,2089 ,2098 ,2099 ,2107में भी यही स्थिति है मित्रों उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि रक्षाबंधन और श्रावणी उपाक्रम 11/8/2022 को ही मनाए। यही तर्कसंगत है।

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