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शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का शिक्षा पर अभिनव प्रयोग सराहनीय.

देहरादून, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास और देवभूमि उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय देहरादून के मध्य देवभूमि उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय देहरादून परिसर में “भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय के उत्कृष्ट केंद्र स्थापना को लेकर अनुबंध किया गया। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास जो कि पूरे भारत में शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों में शिक्षा में भारतीयता और भारतीय संस्कृति को लेकर पिछले लगभग 15 वर्षो से शिक्षविद्दो के साथ मिलकर उत्कृष्ट रूप से निरंतर कार्य कर रहा है। उत्तराखण्ड प्रांत में आज इसी क्रम में यह अनुबंध किया गया है जिसमे शुरुवात में भारतीय ज्ञान परंपरा का एक उत्कृष्ट केंद्र विश्वविद्यालय के परिसर में स्थापित किया जायेगा जिसके अंतर्गत चरित्र निर्माण एवम व्यक्तित्व का समग्र विकास, वैदिक गणित, भारतीय ज्ञान परंपरा और कौशल विकास जैसे विषयो पर छात्र छात्राओं के साथ साथ शिक्षको को भी परशिक्षण प्रदान किया जायेगा। भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर पूरे उत्तराखण्ड ही नही अपितु पूरे उत्तर भारत में यह पहला उत्कृष्ट केंद्र होगा जिसमे आज के आधुनिक युग की मॉडर्न शिक्षा को भारतीय संस्कृति और परंपरा को मूल आधार बनाकर छात्र छात्राओं को उनके बेहतर भविष्य के अनुसार प्रशिक्षण देकर तैयार किया जायेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार मां, मातृभूमि और मातृभाषा को उच्च शिक्षा और कौशल विकास के प्रशिक्षण का समावेश कर एक नई दृष्टि से उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करना इस केंद्र का प्रमुख उद्देश्य रहेगा। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी जी , उत्तर क्षेत्र एवं पश्चिमी क्षेत्र के संयोजक माननीय जगराम जी और देवभूमि उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संजय बंसल जी व उप कुलाधिपति अमन बंसल जी के साथ साथ देवभूमि उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.प्रीति कोठियाल , कुलसचिव विनोद कुमार और डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो.संदीप शर्मा अनुबंध के समय उपस्थित रहे। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास उत्तराखण्ड प्रांत से प्रांत संरक्षक प्रो.नीरज तिवारी, संयोजक प्रो.अशोक मेंदोला, सह संयोजक अनुज शर्मा, वैदिक गणित के सह संयोजक प्रो मुकेश कुमार, पर्यावरण विषय के संयोजक पर्यवरणविद् विनोद जुगलान, प्रचार प्रसार विषय के संयोजक अभिषेक शर्मा,प्रो.आलोक पांडे, राहुल तंवर, प्रांत के बौद्धिक प्रमुख भास्कर बिजलवान जी,लेफ्टिनेंट डॉक्टर बृजलानी चौहान भी उपस्थित रहे। शिक्षा से जुड़े एवं विज्ञान के प्रचार प्रसार से सरोकार रखने वाले प्रेम प्रकाश उपाध्याय “नेचुरल ” ने इसे भारतीय परिपेक्ष्य में शिक्षा देने को पुरातन को आधुनिकता के साथ समन्वय को एक अभिनव प्रयोग बताया। सभा में सभी सदस्यों ने न्यास के इस प्रयास की सराहना की।

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