आध्यात्मिक
जानिए यहां बृक्ष की गोद में स्थित सूर्या देवी की महिमां है अपरम्पार
हल्द्वानी। देवभूमि उतराखण्ड में शक्तिपीठों की भरमार है। यहां हर स्थान-स्थान पर स्थित देवी के शक्ति स्थल परम पूजनीय है। नैनीताल जनपद के हल्द्वानी क्षेत्र अंतर्गत गौला पार से लगभग 17 किलोमीटर आगे सेलजाम नदी के तट पर सूर्या देवी का पावन स्थान सदियों से भक्तों को असीम व अलौकिक शान्ति प्रदान करता आ रहा है। इस स्थान पर पहुचनें पर सांसारिक मायाजाल में भटके मानव की समस्त ब्याधियां शान्ति को प्राप्त हो जाती है।
सूर्या देवी माँ के दर्शन करने यहां भक्तजन हमेशा आते जाते रहते हैं। खासतौर पर नवरात्र के दिनों माँ के दर्शन करने भक्तों की भारी भीड़ लग जाती है। कहते हैं कि सूर्या देवी क्षेत्र की महिमा अपरंपार है माँ सूर्या देवी के शरणागत भक्तों को स्वप्न में भी दुख नहीं छू पाता है।
इस देवी को अनेकों नामों से पुकारा जाता है,जिनमें क्षीर वृक्ष स्वरुपिणी, दयनीये, दयाधिके, जय करुणारुपे, सूर्या देवी, मंगला, वैष्णवी, माया, कालरात्रि, महामाया, मंतगी, काली कमलवासिनी, शिवा, सर्वमंगलरुपिणी आदि प्रमुख है। अन्य अनन्त नामों से भक्तों के हदय में वास करने वाली महेश्वरी महादेवी की पूजा अर्चना से व आराधना करने पर भगवती दुर्गा कष्टप्रद नरक रुपी दुर्ग से उद्वारकर परम पद प्रदान करती है।
भक्तों की आस्था की प्रतीक माँ सूर्या देवी मंदिर की मान्यता के पीछे कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि ठोस पौराणिक आधार हैं। यही कारण है कि न सिर्फ नवरात्र बल्कि प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। सूर्या देवी मंदिर स्थानीय जनमानस में काफी लोकप्रिय है। मंदिर समिति के अध्यक्ष धीरू रैकवाल व समाजसेवी महिपाल रैकवाल ने बताया कि दूर दराज से भी भक्तों का आगमन यहाँ साल भर लगा रहता है। समय-समय पर होने वाले धार्मिक आयोजनों में लोग भारी संख्या में अपनी भागीदारी दर्ज कराते है। गौलापार क्षेत्र के बड़े-बुजुर्ग बताते है कुछ वर्ष पूर्व तक प्रत्येक भागवत और नवरात्रि के समय यहाँ पर देवी माँ का वाहन सिंह मंदिर में आता और सूर्या देवी माता के समक्ष अपना शीश नवाता था।
माँ सूर्या देवी मंदिर महाभारत कालीन गाथाओं को भी अपने अंदर समेटे हुए है। माना जाता है की वनवास काल के दौरान पांडवों ने अपना काफी समय यहीं सूर्या देवी माँ के चरणों में व्यतीत किया था। सूर्या देवी मंदिर की विषेशता यह है की यह मंदिर शेल्जाम नदी के तट पर एक वट वृक्ष के मध्य में है। भक्तजनों को माँ सूर्या देवी की पूजा-अर्चना के लिए सीढ़ी के सहारे वृक्ष के मध्य तक जाना पड़ता है। सदियों से स्थित यह वृक्ष सूर्या देवी माँ की विराट महिमा का बखान करता प्रतीत होता है। माँ सूर्या देवी मंदिर से कुछ दूरी पर ही एक कुटिया स्थित है। जहां भक्तजन भजन-कीर्तन, विश्राम आदि किया करते है। जिसकी सुंदरता देखते ही बनती है। कुछ भक्तजन रात्रि को विश्राम इसी कुटिया में करते है और प्रातः काल मंदिर के सामने बहने वाली नदी में स्नान कर देवी माँ की पूजा-अर्चना कर करते हैं।
राजेन्द्र पंत, रमाकांत














