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उत्तराखण्ड

उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए तैयार, जल्द अस्तित्व में आएगी SDRF की नई कंपनी

प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए जल्द ही राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की एक और कंपनी अस्तित्व में आएगी। नई कंपनी बनाने के लिए शासन स्तर पर कार्रवाई चल रही है। मौजूदा समय में एसडीआरएफ की पांच कंपनियां हैं, जो प्रदेशभर के दुर्गम क्षेत्रों में स्थापित 42 पोस्टों में है।

एसडीआरएफ के जवान किसी भी प्रकार की आपदा में सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचकर रेस्क्यू शुरू करते हैं। डोईवाला स्थित एसडीआरएफ के मुख्यालय के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एसडीआरएफ को एक और कंपनी बनाने के आदेश जारी किए थे।

सारी औपचारिकता हुई पूरी
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद एसडीआरएफ के कमांडेंट मणिकांत मिश्रा ने कार्रवाई शुरू की। अब कंपनी तैयार करने के लिए सभी औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं। संभवत: एक माह के अंदर नई कंपनी अस्तित्व में आ जाएगी। नई बनने जा रही कंपनी के लिए स्टाफ नागरिक पुलिस, फायर ब्रिगेड, पीएससी व अन्य विंगों से प्रतिनियुक्ति पर शामिल किया जाएगा।

कंपनी में 170 कार्मिकों को किया जाएगा शामिल
कंपनी में करीब 170 कार्मिकों को शामिल किया जाएगा। इनमें निरीक्षक से लेकर आरक्षी तक शामिल किए जाएंगे। इसमें कुछ एसडीआरएफ के जवान जबकि कुछ अन्य विंगों से फोर्स तैनात होगा। एसडीआरएफ में शामिल होने वाले नए स्टाफ को अलग-अलग जगह प्रशिक्षण दिया जाएगा। एसडीआरएफ अब तक 14,415 घायलों का रेस्क्यू कर 2467 शव बरामद कर चुकी है। इसके अलावा एसडीआरएफ ने 480 जानवर भी रेस्क्यू किए।

वर्ष 2013 में अस्तित्व में आई थी एसडीआरएफ
वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद उत्तराखंड में एसडीआरएफ की स्थापना हुई थी। उस समय केवल दो कंपनी बनाई गई थी। वर्तमान समय में एसडीआरएफ की पांच कंपनियां हैं, जिसमें केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, डीपी ड्राइविंग टीम, हाई एल्टीट्यूड रेस्क्यू टीम, कैनाइन टीम जैसे विशेषज्ञ टीमें शामिल हैं।

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एसडीआरएफ के गठन के समय दो कंपनियों में सिर्फ 154 जवान थे, जबकि अब बढ़कर 470 हो चुके हैं। एसडीआरएफ ने केदारनाथ आपदा के बाद केदारघाटी को पुर्नव्यवस्थित करने, आपरेशन मुक्ति के माध्यम से प्राप्त शवों का धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ दाह संस्कार, अस्थियों का विसर्जन तथा चारधाम यात्रा को दोबारा संचालित किए जाने में महत्वूपर्ण भूमिका निभाई।

एसडीआरएफ की हैं 42 पोस्टें
दुर्गम क्षेत्रों में 42 पोस्टों में है एसडीआरएफ प्रदेश के 13 जिलों में इस समय एसडीआरएफ की 42 पोस्टें हैं। इनमें देहरादून में चकराता, सहस्रधारा, डाकपत्थर व त्यूणी, टिहरी में ढालवाला, कोटी कॉलोनी, ब्यासी व घनसाली, उत्तरकाशी में उजैली, भटवाड़ी, बड़कोट, मोरी, चिन्यालीसौड़, गंगोत्री, यमुनोत्री, भोजवासा, पौड़ी में कोटद्वार, सतपुली, श्रीनगर, धुमाकोट, चमोली में जोशीमठ, गौचर, पांडूकेश्वर, भ्यूंडार, घांघरिया, बद्रीनाथ, रुद्रप्रयाग में सोनप्रयाग, रतूड़ी, केदारनाथ, लिनचोली, भीमबली, अगस्तमुनि, हरिद्वार में लक्सर, चंपावत में चंपावत व टनकपुर, पिथौरागढ़ में पुलिस लाइन पिथौरागढ़, अस्कोट, बागेश्वर में कपकोट, नैनीताल में नैनीझील, खेरना, अल्मोड़ा में सरियापानी और उधमसिंहनगर में रुद्रपुर पोस्टें हैं।


कमांडेंट ने कही ये बात
एसडीआरएफ में एक और कंपनी तैयार की जा रही है। जल्द ही छठवीं कंपनी अस्तित्व में आ आएगी। मुख्यमंत्री के आदेश पर नई कंपनी का गठन किया जा रहा है। नई कंपनी में प्रतिनियुक्त पर पुलिस कर्मियों की नियुक्ति की जाएगी। – मणिकांत मिश्रा, कमांडेंट, एसडीआरएफ

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