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बौद्धिक संपदा अधिकार की जागरूकता भविष्य के भारत के लिए आवश्यक

यू ओ यू हल्द्वानी में सोमवार को बौद्धिक संपदा अधिकार पर कंप्यूटर साइंस विभाग द्वारा पांच दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ प्रोफेसर जितेंद्र पांडे (डायरेक्टर स्कूल ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड आईटी) द्वारा किया गया इसके अतिरिक्त उद्यमिता विकास केंद्र अहमदाबाद से ट्रेनर श्री हितेन्दु परमुर तथा श्री सुमित मिश्रा भी उपस्थित रहे । कार्यशाला में मुख्य वक्ता श्री विकास असावत(पेटेंट एंड ट्रेडमार्क एटर्नी), ने बताया कि पेटेंट कैसे अप्लाई किया जाता है तथा पेटेंट की वैद्यता कब तक रहती है और कंपनियां अपने ट्रेड सीक्रेट और ट्रेडमार्क को आईपीआर के अंतर्गत किस तरह रजिस्टर करवाती है । उन्होंने यह भी बताया कि ट्रेडमार्क और ट्रेड सीक्रेट को रजिस्टर करवाना अति आवश्यक होता है ताकि कोई भी आपके ट्रेड सीक्रेट को कॉपी ना कर सके। आज के समय में नए इनोवेशन लगातार हो रहे हैं नए इनोवेशन का पेटेंट करा कर इनका टेक्नोलॉजी ट्रांसफर किया जा सकता है जिससे आर्थिक आए तो बढ़ाई जा सकती है साथ ही यह नए स्टार्टअप को शुरू करने में भी सहायक सिद्ध होगा । कोई भी सरकारी संस्था अथवा एनजीओ ,जीआई टैग को आईपीआर के अंतर्गत कैसे रजिस्टर करवा सकती है आदि विषयों पर प्रकाश डाला । कार्यक्रम में श्री हिमांशु गोयल, (वैज्ञानिक यूकोस्ट) ने इंडीजीनस नॉलेज सिस्टम पर आईपीआर की उपयोगिता के बारे में बताया उन्होंने फोक कल्चर, फोक डांस व सांस्कृतिक धरोहर में आईपीआर के महत्व को बताया । अंत में डॉ आशुतोष भट्ट ने नवाचार और उद्यमिता में बौद्धिक संपदा का महत्व समझाया । उक्त कार्यशाला में उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी हल्द्वानी, डब्ल्यू आई टी देहरादून, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी भीमताल, एस एस जे अल्मोड़ा केंपस, पाल कॉलेज ऑफ़ टेक्नोलॉजी हल्द्वानी, अपेक्स इंस्टिट्यूट रामपुर, सीमांत इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट पिथौरागढ़ आदि के 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया ।कार्यशाला में डॉ बालम दफौटी, डॉ मनोज पाण्डेय , डॉ नीलिमा बुधानी, ललिता बिष्ट, डॉ शिल्पा गुणवंत, हिमानी शाह, आशीष जोशी व रिया गिरी आदि उपस्थित रहे ।

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