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modi 3.0 : अजय टम्टा को ही क्यों मिली मोदी कैबिनेट में जगह, क्यों रह गए बलूनी और त्रिवेंद्र पीछे ?



लोकसभा चुनावों में अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ सीट से हैट्रिक लगाने वाले सांसद अजय टम्टा को मोदी कैबिनेट में दोबारा जगह मिली है। जबकि पीएम मोदी और अमित शाह के करीबियों में एक माने जाने वाले गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी मंत्रिमंडल में अपनी जगह नहीं बना पाए। इसके साथ ही उत्तराखंड की राजनीति के दिग्गजों में शामिल पूर्व सीएम और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत को भी मोदी कैबिनेट में एंट्री नहीं मिल पाई।


अजय टम्टा को ही क्यों मिली मोदी कैबिनेट में जगह ?
अजय टम्टा ने केंद्रीय राज्य मंत्री पद की शपथ ले ली है। उन्हें दोबारा केंद्र सरकार में मंत्री बनने में सफलता मिली है। उन्हें दबारा मंत्रिमंडल में जगह मिलने की सबसे बड़ी वजह प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों में उनका फिट बैठना है। उनको कैबिनेट में शामिल करने के साथ भाजपा हाईकमान ने उत्तराखंड में जातीय समीकरण साधे हैं।

भाजपा हाईकमान ने उत्तराखण्ड में चुना संतुलन का रास्ता
अजय टम्टा को कैबिनेट मंत्री बनाने के साथ ही भाजपा हाईकमान ने उत्तराखण्ड में संतुलन का रास्ता चुना है। इसी के साथ भाजपा हाईकमान ने उत्तराखंड में दलित, ब्राह्मण व ठाकुर के बीच संतुलन बना लिया है। बता दें कि मुख्यमंत्री ठाकुर हैं, प्रदेश अध्यक्ष ब्राह्मण, कल्पना सैनी महिला और ओबीसी समुदाय से हैं। जबकि अनुसूचित जाति के अजय टम्टा को मंत्री बना कर पार्टी ने जातिगत समीकरण को साधने का काम किया है।

क्यों रह गए बलूनी और त्रिवेंद्र पीछे ?
गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी और पूर्व सीएम और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम मोदी कैबिनेट में शामिल होने की रेस में सबसे आगे था। इस बात की चर्चाएं थी कि अनिल बलूनी के नाम पर ही मुहर लेगेगी। लेकिन नाम सामने आने के बाद सभी को हैरानी हुई। गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी और पूर्व सीएम और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत को मोदी मंत्रिमंडल में इसलिए शामिल नहीं किया गया क्योंकि अजय टम्टा को केंद्रीय राज्य मंत्री बनाकर भाजपा हाईकमान ने उत्तराखण्ड में बैलेंस बना दिया है।

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