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उत्तराखंड में श्रमिकों की सेहत पर खतरे के संकेत, बीपी-हार्ट रेट के साथ टीबी की भी जांच

हल्द्वानी। प्रदेश में निर्माण कार्यों में जुटे श्रमिकों की सेहत को लेकर सामने आए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (बीओसीडब्ल्यू) की ओर से अगस्त से अक्टूबर 2026 के बीच कराई गई स्वास्थ्य जांच में दिल की धड़कन, रक्तचाप (बीपी) और टीबी की स्क्रीनिंग पर विशेष ध्यान दिया गया। तीन माह के दौरान प्रदेशभर में 24,478 श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच की गई।

प्रदेश के करीब तीन लाख पंजीकृत श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से श्रम विभाग के भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड ने लैब ऑन व्हील की सुविधा शुरू की है। मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य योजना के तहत मोबाइल लैब के माध्यम से श्रमिकों को एक्स-रे, बीपी चेकअप, खून की जांच समेत कुल 44 तरह की जांचें निश्शुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस योजना के तहत श्रमिकों के कार्यस्थलों और श्रम प्वाइंट के आसपास मोबाइल लैब पहुंचकर स्वास्थ्य जांच कर रही है। अगस्त से अक्टूबर के बीच कुल 24,478 श्रमिकों की विभिन्न जांचें की गईं। इनमें 957 एक्स-रे के माध्यम से टीबी स्क्रीनिंग और 13 एचआईवी जांच भी शामिल हैं।

दिल की धड़कन और बीपी की जांच पर विशेष जोर

स्वास्थ्य जांच के दौरान 7,818 श्रमिकों की पल्स रेट, 5,947 की ईसीजी-टैकीकार्डिया, 5,633 की सिस्टोलिक बीपी और 4,110 की डायस्टोलिक बीपी जांच की गई। इन जांचों के माध्यम से दिल की धड़कन में असामान्यता और रक्तचाप से जुड़ी संभावित समस्याओं की पहचान करने का प्रयास किया गया। हालांकि, इन आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं होता कि कितने श्रमिकों में वास्तव में बीमारी की पुष्टि हुई है।

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इन जिलों में हुई श्रमिकों की जांच

जिलावार आंकड़ों के अनुसार चंपावत में सबसे अधिक 7,296 श्रमिकों की जांच की गई। देहरादून में 4,991, पौड़ी गढ़वाल में 3,419, हरिद्वार में 2,613 और नैनीताल में 1,853 श्रमिकों की जांच हुई। इसके अलावा अल्मोड़ा में 1,084, बागेश्वर में 1,069 और चमोली में 2,153 जांचें दर्ज की गईं। पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, ऊधमसिंह नगर और उत्तरकाशी में भी श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच की गई।

डॉक्टर की जांच के बाद ही बीमारी की पुष्टि

श्रम विभाग के अधिकारियों के अनुसार ये आंकड़े प्रारंभिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग से संबंधित हैं। स्क्रीनिंग के आधार पर किसी श्रमिक में बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। जांच के दौरान किसी तरह की असामान्यता सामने आने पर संबंधित श्रमिक को डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है। इसके बाद विस्तृत जांच के आधार पर ही बीमारी की पुष्टि हो सकती है।
तीन माह में हुई प्रमुख जांचें

पल्स रेट : 7,818
ईसीजी-टैकीकार्डिया : 5,947
बीपी सिस्टोलिक : 5,633
बीपी डायस्टोलिक : 4,110
एक्स-रे टीबी स्क्रीनिंग : 957
एचआईवी जांच : 13
सरकारी अस्पतालों में फॉलोअप की व्यवस्था

बोर्ड की ओर से श्रमिकों के लिए मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत श्रमिकों की निश्शुल्क स्वास्थ्य जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर श्रमिकों को डॉक्टरों से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है। सरकारी अस्पतालों में भी जांच रिपोर्ट के आधार पर उनका फॉलोअप किया जा रहा है।— प्रकाश चंद्र दुम्का, श्रमायुक्त

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