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महिला की मौत के बाद एक्शन में वन विभाग, बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू सेंटर भेजा

मीनाक्षी

नैनीताल। नैनीताल वन प्रभाग के सूर्यागांव क्षेत्र में बीते शुक्रवार को वन्य जीव के हमले में एक महिला की मौत के बाद वन विभाग की टीम ने क्षेत्र से बाघिन को ट्रेंकुलाइज किया है।

तीन दिन से क्षेत्र में कांबिंग कर रही विभागीय टीम को रात करीब नौ बजे सफलता मिली। बाघिन की उम्र ढाई से तीन वर्ष आंकी जा रही है।

बाघिन ने एक दिन पूर्व ही क्षेत्र में बैल को शिकार बनाया था। जिसे सुरक्षित रानीबाग रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है। जिसके डीएनएन सेंपल जांच व शव से मिलान होने के बाद ही आदमखोर होने की पुष्टि होगी।बता दें कि बीते शुक्रवार को सूर्यागांव क्षेत्र निवासी 54 वर्षीय हंसी देवी की वन्य जीव के हमले में मौत हो गई थी। ग्रामीणों को रात को महिला का शव क्षत विक्षत अवस्था में घने जंगल के बीच पड़ा हुआ मिला। घटना के बाद से ही ग्रामीणों में भारी आक्रोश था।जिसके बाद वन विभाग ने क्षेत्र में ट्रेंकुलाइज टीम तैनात कर ट्रेप कैमरे भी स्थापित किये थे। दो दिन तक ट्रेप कैमरे में कोई हलचल तो नहीं दिखी, लेकिन रविवार को वन कर्मियों को जंतवाल गांव के समीप जंगल में एक बैल मृत मिला।जिसका संभवत: बाघ व गुलदार ने शिकार किया था। जिसके बाद ट्रेकुलाइज टीम ने पास में ही अपना डेरा डाल लिया।

सोमवार रात करीब नौ बजे ट्रेकुलाइज टीम को बैल के समीप हलचल नजर आई। कुछ मिनटो में जब पाया कि एक बाघ बैल को खा रहा है तो ट्रेकुलाइज टीम प्रभारी डा. हिमांशु पांगती ने ट्रेकुलाइज गन से 9:05 बजे बाघ पर बेहोशी का डाठ मारा।करीब 20 मिनट बाद खोजबीन करने पर घटना स्थल से कुछ ही मीटर की दूरी पर बेहाश बाघिन बरामद हो गई। डा. पांगती ने बताया कि ट्रेंकुलाइज की गई बाघिन की उम्र करीब ढाई से तीन वर्ष है।

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जिसे फिलहाल रानीबाग रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है। बताया कि पकड़ी गई बाघिन के हमले में ही महिला की मौत हुई थी इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। डीएनए सेंपल लेकर डब्लूआईआई भेजे जायेंगे। जहां महिला के डीएनए से मिलान के बाद ही उसके हमलावर होने की पुष्टि होगी।डा. पांगती ने बताया कि महिला का सूर्यागांव व जहां बाघिन को ट्रेंकुलाइज किया गया जंतवालगांव एक दूसरे से लगा हुआ है। यह क्षेत्र रानीबाग के साथ ही नंधौर क्षेत्र से भी सटा है। जहां अक्सर बाघ की मूवमेंट बनी रहती है। हालांकि बाघिन में कोई शारीरिक अक्षमता नहींं दिखी है। हालांकि उसके हमलावर होने की पुष्टि डीएनए मिलान से ही हो सकेगी।

वन विभाग की तत्परता से मिली सफलता
शुक्रवार को घटना के बाद रात को ही डीएफओ आकाश गंगवार, एसडीओ ममता चंद, रेजर नितिन पंत ट्रेंकुलाइज टीम व वन कर्मियों के साथ क्षेत्र में पहुंच गए थे। 50 से अधिक वन कर्मचारी जंगल में कांबिंग कर वन्य जीवों की मूवमेंट पर नजर बनाये हुए थे।

वहीं अगले दिन डीएफओ ने खुद मौके पर जाकर ग्रामीणों को वन्य जीवों के हमलों को लेकर जागरुक भी किया था। विभागीय तेजी का नतीजा रहा कि महिला की मौत के चार दिन के भीतर विभाग को सफलता मिल गई।

टीम में यह रहे शामिल
डा. हिमांशु पांगती, डा. तरुण गर्ग, रेंजर मनोरा नितिन पंत, रेंजर भवाली विजय मेलकारी, रेंजर अभय जोशी समेत वन विभाग व रेस्क्यू सेंटर की टीम शामिल रही।

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