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चारधाम यात्रा से पहले गंगोत्री मार्ग की हालत चिंताजनक, 34 किमी रोड पार करने में लग रहे 3 घंटे, कई जगह धंस रहीं सड़कें

पिछले साल उत्तराखंड के धराली इलाके में आई प्राकृतिक आपदा ने गंगनानी से गंगोत्री धाम तक करीब 40 किलोमीटर सड़क को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया था। अब बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) और राज्य की टीमें इस रास्ते को ठीक करने में जुटी हैं, क्योंकि 19 अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू हो रही है। सबसे पहले गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे।

गंगोत्री मार्ग की स्थिति
उत्तरकाशी के पास से शुरू होने वाला यह रास्ता कई जगह बेहद खतरनाक हो चुका है। गंगनानी से धराली तक करीब 34 किलोमीटर सड़क बहुत संकरी हो गई है। एक तरफ पहाड़ और दूसरी तरफ भागीरथी नदी बह रही है। कई जगह सड़क इतनी संकरी है कि एक समय में सिर्फ एक ही गाड़ी निकल सकती है। पहले जहां 1–1.5 घंटे में गंगोत्री पहुंच जाते थे, अब 3–4 घंटे लग रहे हैं। इयवना (इयाना) क्षेत्र में 500 मीटर सड़क अब भी पूरी तरह नहीं बन पाई है। आपदा के निशान आज भी साफ दिखाई देते हैं—टूटे पुल, बड़े-बड़े पत्थर और बहकर आई मलबे की ढेरियां। नदी का बहाव भी बदल गया है, जिससे जमीन लगातार कट रही है।
यात्रा के दौरान बड़ी चुनौती
चारधाम यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालु इस रास्ते से गुजरते हैं। ऐसे में संकरी और कमजोर सड़कें प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राहत और बचाव की मॉक ड्रिल भी की गई है।

यमुनोत्री मार्ग भी सुरक्षित नहीं
यमुनोत्री जाने वाला रास्ता भी कम खतरनाक नहीं है। धरासू बैंड से आगे NH-134 पर सड़क कई जगह टूटी और धंसी हुई है। इस पूरे इलाके में 10 डेंजर जोन चिन्हित किए गए हैं। बारिश और पानी के बहाव से कई जगह सड़कें कमजोर हो गई हैं। हनुमान चट्टी के आसपास सड़क बहुत संकरी हो जाती है, जिससे आवाजाही मुश्किल हो जाती है। जानकीचट्टी तक कुछ जगहों पर काम अभी भी जारी है और यात्रा शुरू होने तक पूरा होना मुश्किल लग रहा है।

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रजिस्ट्रेशन में कमी
इस साल चारधाम यात्रा के लिए अब तक लगभग 14 लाख पंजीकरण हुए हैं, जबकि पिछले साल इस समय तक यह संख्या करीब 28 लाख थी। गंगोत्री और यमुनोत्री के लिए भी पंजीकरण कम हुए हैं।

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