Connect with us

कुमाऊँ

हुक्मरानों को अंगूठा दिखाते बच्चे

गली-गली सब्ज़ी बेचने को अभिशप्त हैं ये किशोर

  • हल्द्वानी। तीन बच्चे राजू, बंटी व श्याम (परिवर्तित नाम)- उम्र भी मात्र 11 से 14 के बीच .. तपती दुपहरिया में कोरोना के खौफ से अंजान गली-गली सब्जी बेचने को अभिशप्त हैं। देखा जाए तो ये बाल श्रम है, लेकिन यहां किसी ने इन्हें ‘ एम्प्लाॅय ‘ नहीं किया है। पापी पेट के लिए ये आज घर-घर फेरी लगाने को मजबूर हैं, क्योंकि शहर में लगे जनता कर्फ्यू के कारण मां-बाप का काम छूट गया। इन बच्चों की मां काम वाली है तो पिता लेबर.. आजकल दोनों के ही काम ठप हैं। पिता अस्वस्थ हुए तो इन बच्चों को ही घर चलाने की जद्दोजहद करनी पड़ी।


अभी इन बच्चों की उम्र भी इतनी कम है कि आवाज़ में भी भारीपन नहीं आ पाया है। अपनी पतली आवाज़ में चिल्लाते फिरते हैं- सब्जी ले लो सब्जी। बालक होने के कारण भी लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते और मोल-भाव कर सब्ज़ी के पैसे कम कराने की जुगत में लगे रहते हैं। जब मैं इन्हें रोक कर फोटो लेने लगा तो ठेले के पीछे छिपने लगे, कहने लगे फोटो का क्या करोगे। मैंने कहा, तुम्हारा कोई नुकसान नहीं होगा तो फोटो खिंचाने को तैयार हुए। मां-बाप भी दिल पर पत्थर रख कर ही इन्हें सब्ज़ी बेचने के लिए भेजते होंगे और जब तक ये शाम को घर नहीं पहुंच जाते होंगे, उनका हृदय पीपल के पत्ते की तरह कांपता रहता होगा।
ये बच्चे कोरोना की भयावहता को नहीं जानते, तभी तो मास्क इनकी ठोड़ी पर रहता है और कोई टोक दे तो उसे नाक तक चढ़ा लेते हैं। जिस हाथ से सब्जी देते हैं, उसी से लगातार मास्क को छूते रहते हैं।

यह भी पढ़ें -  परियोजना निदेशक अजय सिंह ने MUY–RBI कार्यालय का किया निरीक्षण, समयबद्ध क्रियान्वयन पर दिया जोर

सेनेटाइजर का मतलब ही नहीं जानते, जान भी जाएंगे तो खरीदेंगे कैसे ? दो वक्त की रोटी के लाले पड़े हैं तो कहां से सेनेटाइजर खरीदेंगे और कहां से रोज नया मास्क। खरीदारों में कोई कोरोना संक्रमित हो सकता है, पर ये बच्चे इससे बेखबर हैं। खरीदारों से दो गज़ की दूरी भी कैसे बनाएंगे, तब भला उनसे सब्जी ही कौन खरीदेगा ?
इन बच्चों की उम्र देख कर भी किसी ग्राहक को तरस नहीं आता। कोई उनसे पानी तक के लिए नहीं पूछता। जब कोई सब्ज़ी लेने के लिए इन्हें रोकता है तो छांव तलाश कर बैठ जाते हैं। फिर दोपहर में वही रूखा-सूखा खाना। जब कोई सब्ज़ी नहीं खरीदता तो आपस में ही खेलने लगते हैं।
सभी राज्य अपने नागरिकों के कल्याण के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं करते हैं, अपने आपको उनके प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध दिखाते हैं .. मुफ्त अनाज देने की बात करते हैं, पर इन बच्चों को तो देख कर ऐसा नहीं लगता। ये तो हमारे राज्य के हुक्मरानों को अंगूठा दिखाते ही नजर आते हैं।

-रवि शंकर शर्मा

Continue Reading
You may also like...

More in कुमाऊँ

Trending News