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कार्बेट के पास नगर वन में दिखेगी उत्तराखंड की संस्कृति, मिलेगा रोजगार और राजस्व

पर्यटन नगरी रामनगर में आने वाले पर्यटकों को नाइट स्टे के लिए वुड काटेज, उत्तराखंड की संस्कृति, वाइल्ड लाइफ शो, परिधान, पहाड़ी खान पान, हर्बल गार्डन एवं स्थानीय उत्पाद अब एक ही प्लेटफार्म में मिलेंगे।
योजना का पूरा डिजाइन वन विभाग ने तैयार कर लिया है। इस योजना के धरातल पर उतरने से वन विभाग को राजस्व तो मिलेगा ही, स्थानीय भी रोजगार से जुड़ेंगे।राज्य का यह पहला ऐसा नगर वन होगा, जहां पर्यटक एक ही जगह पर पूरे उत्तराखंड को महसूस कर सकेंगे
कार्बेट व आसपास एवं होटल रिसोर्ट में वर्ष भर पर्यटक आते हैं। ऐसे में पर्यटकों के लिए एक ऐसा डेस्टिनेशन बनाया जा रहा है, जहां वे देवभूमि उत्तराखंड की स्थानीय अनुभूति महसूस करें और तमाम जानकारी प्राप्त कर सके इसके लिए रामनगर वन प्रभाग के अंतर्गत हल्द्वानी-रामनगर मार्ग के नजदीक स्थित पांच हेक्टेयर क्षेत्र में फैले नगर वन में कार्बेट के निदेशक व वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डा. साकेत बडोला की ओर से इस पूरी योजना का खाका तैयार किया गया है। नगर वन में पर्यटकों के नाइट में ठहरने के लिए लकड़ी से निर्मित छह काटेज, स्थानीय खाद्य सामग्री एवं हस्तनिर्मित उत्पादों को बेचने के लिए छह दुकानें, पहाड़ी खाना पराेसने के लिए एक रेस्टोरेंट खोला जाएगा
इसके अलावा ढाई तीन सौ लोगों के बैठने की क्षमता वाला ओपन गोल एमपी थियेटर बनाया जाएगा। जिसमें वाइल्ड लाइफ फिल्म शो दिखाए जाएंगे। पहली बार इस पूरी योजना के आर्किटेक्चर में ऐंपण की पारंपरिक विधि का प्रयोग किया जाएगा।रामनगर वन में पर्यटकों के लिए साइकिल ट्रैक, वाकिंग ट्रेल भी बनाई जाएंगे। नगर वन में शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किए जाएंगे। वन्य जीवों एवं संस्कृति की फोटोग्राफी, ऐपण गैलरी भी होगी। शाम को यहां पर्यटक आकर उत्तराखंड से जुड़ी तमाम जानकारी प्राप्त करेंगे
इस पूरी योजना का मकसद यह है कि कार्बेट लैंडस्केप में आने वाले पर्यटकों को एक ही प्लेटफार्म में उत्तराखंड से जुड़ी तमाम जानकारी मिल जाए। स्थानीय सांस्कृतिक कलाकार, पहाड़ी भोजन बनाने वाले, हस्तनिर्मित उत्पाद बना रहे लोगों को भी एक प्लेटफार्म मिलेगा।कार्बेट आने वाले पर्यटकों के लिए शाम को देखने को कुछ नहीं रहता है। यहां आकर वह अनुभूति कर सकेंगे। प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है। इसी वित्तीय वर्ष में इसका कार्य शुरू हो जाएगा। – डा. साकेत बडोला, निदेशक सीटीआर एवं वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त, हल्द्वानी







