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उत्तराखंड में वक्फ की मनमानी पर लगेगा ब्रेक, एक्शन मोड में धामी सरकार

 

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उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों को लेकर धामी सरकार ने बेहद सख्त रुख इख्तियार कर लिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जब तक वक्फ संपत्तियां केंद्र सरकार के ‘उम्मीद’ पोर्टल पर दर्ज नहीं किया जाएगा तब तक ये माना नहीं जाएगा कि संपत्ति वक्फ बोर्ड की है।

उत्तराखंड में वक्फ की मनमानी पर लगेगा ब्रेक

बता दें इस बीच राजधानी देहरादून में साल 2023 का वो मामला चर्चा में आ गया है जिसमें रायपुर थाना क्षेत्र के चूना भट्टा इलाके के अधोइवाला में वक्फ संपत्ति (कब्रिस्तान संख्या-8) पर बाहरी लोगों ने कब्ज़ा किया हुआ है। जिसकी लिखित शिकायत स्थानीय निवासी इस्लामुद्दीन अंसारी ने बोर्ड से की हुई है।

70 से ज्यादा कब्ज़ाधारियों को भेजा नोटिस

शिकायतकर्ता ने बताया कि वक्फ जमीन पर करीब 200 मकान और दुकानें बनी हुई है। जिस पर अब वक़्फ बोर्ड ने संज्ञान लेते हुए करीब 70 से ज्यादा कब्ज़ाधारियों को नोटिस भेजकर संपत्ति का मालिकाना हक दिखाने के लिए कहा है। इसके अलावा बोर्ड के अनुरोध पर ज़िलाधिकारी ने जमीन की पैमाइश का भी आदेश दिया है।

संपत्तियों को कब्ज़ा मुक्त कर बनाया जाएगा गरीबों का आशियाना

वक़्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने भी साफ कर दिया है कि जिन वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण किया गया है उन तमाम वक्फ संपत्तियों को कब्ज़ा मुक्त करवाकर, उन पर गरीब मुस्लमानों को घर बनाकर दिया जाएगा। बता दें कि प्रदेश में कुल 7,288 वक़्फ संपत्तियां लिस्टेड हैं। जबकि 2105 औकाफ संपत्तियां (औकाफ संपत्तियां वो जिसे धार्मिक, धर्मार्थ के उद्देश्य से दान दी गई हो) है। इसके अलावा शेष 5,388 संपत्तियों पर मस्जिद, मदरसे, कब्रिस्तान, ईदगाह, मजार बनी है। लेकिन 1,597 वक़्फ संपत्तियां ही उम्मीद पोर्टल पर दर्ज हैं। वहीं 5,691 वक़्फ संपत्तियों का उम्मीद पोर्टल पर कोई लेखा-जोखा नहीं है।

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इस वजह से पोर्टल पर दर्ज नहीं करा रहे कब्जाधारी

इसके पीछे का कारण दस्तावेज़ों की कमी बताया जा रहा है। क्योंकि कई कब्ज़ेधारियों के पास वक़्फ जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज़ नहीं है। जिसके कारण वे उम्मीद पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने से बच रहे हैं। कुछ मामलों में जानकारी का भी अभाव है। हालांकि इसे सरकार ने कमजोर तर्क मान है क्योंकि वक़्फ संपत्तियों को दर्ज करवाने के लिए मुतवल्लियों को प्रशिक्षण दिया गया है। फिलहाल ऐसे मुतवल्ली के पास 5 जून तक की मोहलत है। इसके बाद जो वक़्फ संपत्तियों उम्मीद पोर्टल पर दर्ज नहीं होंगी, उन्हें अवैध कब्ज़ा मानकर सरकार चिन्हित करेगी।

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