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उत्तराखंड में अवैध खनन रोकने वाले वन अधिकारी पर की थी FIR, हाई कोर्ट ने दिए पूरी कोतवाली के ट्रांसफर के आदेश

मीनाक्षी
नैनीताल। हाई कोर्ट ने विकास नगर में पिछले दिनों अवैध खनन रोकने गए वन विभाग के एसडीओ राजीव नयन नौटियाल पर मुकदमा दर्ज होने पर तीखी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि नौटियाल पर प्राथमिकी रात 12:15 बजे दर्ज की गई, जो कि खनन कारोबारी मनीष चौहान की शिकायत के बाद हुई। कोर्ट ने पूछा कि यहां वास्तव में क्या हो रहा है? आप अपने ही अधिकारी की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं।एकलपीठ ने निर्देश दिया कि प्राथमिकी दर्ज करने वाले अधिकारी को निलंबित किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस क्षेत्र में खनन गतिविधियां पूरी तरह से बंद हो जाएं। कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को इस संबंध में सरकार से आवश्यक निर्देश प्राप्त करने को कहा।
पूरे स्टाफ का तबादला करने का आदेश
एकलपीठ ने पुलिस महानिदेशक व एसएसपी देहरादून को विकास नगर पुलिस स्टेशन के पूरे स्टाफ का तबादला करने का आदेश दिया। अदालत ने एसएचओ से यह स्पष्टीकरण मांगा कि वन अधिकारी के विरुद्ध एफआईआर क्यों दर्ज की गई, जबकि उन्होंने पहले ही अवैध खनन में शामिल खनन माफिया के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। वन अधिकारी की ओर से दर्ज की गई एफआईआर की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी मांगी। कोर्ट ने कहा कि वन अधिकारी को उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर के संबंध में गिरफ्तार नहीं किया जाए।मामले की अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित की गई थी। हाई कोर्ट पहुंचे एसडीओ नौटियाल के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि चौहान और राकेश खनन कार्यों के पीछे के मास्टरमाइंड थे और उन्होंने खनिजों से लदे ट्रकों को सुरक्षित रूप से गुजरने में मदद की, जिससे उन्हें वन विभाग की जांच से बचाया गया। अदालत को घटना का एक वीडियो भी प्रस्तुत किया, जिसमें माफिया के गुंडों को वन अधिकारी को उनकी आधिकारिक गाड़ी से बाहर खींचते और गश्त के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार करते हुए दिखाया गयाकोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को वीडियो को पेन ड्राइव में स्थानांतरित करके अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई।







