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वानिकी प्रशिक्षण अकादमी होगी आधुनिक, बनेंगे नए भवन-लर्निंग सेंटर और स्विमिंग पूल

मीनाक्षी

हल्द्वानी। उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी (यूएफटीए) को आधुनिक बनाया जाएगा, ताकि यहां प्रशिक्षण लेने वाले वनकर्मी मानव वन्यजीव संघर्ष, वनाग्नि, दुर्गम क्षेत्रों में पौधरोपण जैसे चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपट सकें। इसके लिए यहां आधुनिक तकनीक से लैस लर्निंग सेंटर भी बनाया जाएगा। साथ ही आयु पूरी कर चुके नए भवन, कैफेटेरिया, स्विमिंग पूल भी बनाने की योजना है।दरअसल यूएफटीए के भवन काफी पुराने हैं। यहां टाइप ए के 19, टाइप बी के 18, टाइप सी के चार और टाइप डी के 10 भवन हैं, जो अपनी आयु पूरी कर चुके हैं। इसी तरह चार में से दो हार्नबिल और मोनाल हास्टल काफी पुराने हैं।

अब पांच साल की योजना बनाई जा रही है, जिसमें क्रमिक तरीके से पुराने भवनों को ध्वस्त करके नए छात्रावास और आवास बनाए जाएंगे। इसी तरह यहां दो बसें 2011 की हैं, जो अपनी आयु पूरी कर चुकी हैं। अब इनकी जगह तीन से चार नई बसें खरीदने की योजना है। ताकि प्रशिक्षुओं को दूरदराज वनक्षेत्र में व्यावहारिक ज्ञान के लिए भेजा जा सके।

यूएफटीए में लर्निंग सेंटर भी बनाए जाने की योजना है। इसमें पूरी दुनिया में वनों को लेकर हो रहे शोध और माडल के बारे में जानकारियां उपलब्ध होंगी, ताकि प्रशिक्षु नए माडल और तकनीक से अवगत रहें। उन्हें वानिकी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करना भी सिखाया जाएगा। साथ ही किताबी ज्ञान के साथ-साथ केस स्टडी भी बताई जाएंगी। इसमें
राज्य में वानिकी को लेकर हो रहे सफल प्रयोगों की भी जानकारी दी जाएगी।उन्हें वनाग्नि, मानव-वन्यजीव संघर्ष, दुर्गम क्षेत्रों में पौधरोपण और जीविकोपार्जन की केस स्टडी से भी अवगत कराया जाएगा। इसी तरह प्रशिक्षुओं के लिए स्विमिंग पूल भी बनाने की योजना है। इन योजनाओं को अगले महीने पीसीसीएफ की अध्यक्षता में होने वाली कार्यकारिणी समिति की बैठक रखा जाएगा। इनके लिए चरणबद्ध तरीके से बजट स्वीकृत करवाने का लक्ष्य है, ताकि जल्द से जल्द काम शुरू हो सके।

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वहीं प्रशिक्षुओं के लिए कैफेटेरिया भी बनाया जाएगा, जो करीब 10 लाख की लागत से बनेगा। क्योंकि अभी परिसर में कैफेटेरिया नहीं है और प्रशिक्षुओं के लिए मेस के बाद खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं है।पूरे कैंपस के भवन अपनी आयु पूरी कर चुके हैं। इनकी जगह नए भवन बनाए जाएंगे। सभी योजनाओं के लिए काफी बजट की जरूरत होगी। इसलिए पांच वर्ष में चरणबद्ध तरीके से परिसर का कायाकल्प किया जाएगा। – संजीव चतुर्वेदी, डायरेक्टर, उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी

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