Connect with us

Uncategorized

स्वर्णिम चतुर्भुज से गांव-गांव तक सड़क, जानिए BC Khanduri की सबसे बड़ी उपलब्धियां

 

B.C. Khanduri's Achievements

उत्तराखंड ने आज राजनीति का एक ऐसा चेहरा खो दिया, जिसकी पहचान सिर्फ एक मुख्यमंत्री की नहीं बल्कि अनुशासन, ईमानदारी और बड़े विजन वाले नेता की थी। भुवन चंद्र खंडूड़ी (BC Khanduri ) ने 19 मई को आज सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे बीसी खंडूरी पिछले काफी वक्त से अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन की खबर से पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर है।

राजनीतिक जीवन में दिखाई देता था BC Khanduri का सेना में काम करने का असर

1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे भुवन चंद्र खंडूरी ने भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद तक सेवा दी। सेना में 35 साल तक काम करने का असर उनके राजनीतिक जीवन में भी साफ दिखाई दिया। राजनीति में आने के बाद उनका अंदाज बाकी नेताओं से बिल्कुल अलग था। सख्त फैसले लेना, अनुशासन पर जोर देना और सिस्टम को जवाबदेह बनाना उनकी पहचान बन गया।

BC खंडूरी की बड़ी उपलब्धियां (BC Khanduri Achievements)

भुवन चंद्र खंडूरी को सिर्फ सख्त मुख्यमंत्री कहना उनके योगदान को छोटा करना होगा। उन्होंने उन बड़ी परियोजनाओं पर काम किया, जिनका असर आज भी देश और उत्तराखंड दोनों में दिखाई देता है। केंद्र में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री रहते हुए खंडूरी ने देश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों को जोड़ने वाला यह नेटवर्क भारत की विकास गाथा का बड़ा हिस्सा माना जाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम को गति देने में भी उनका बड़ा योगदान रहा। यही वजह रही कि देशभर में हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा मिली।

यह भी पढ़ें -  हरिद्वार में धामी कैबिनेट की बैठक आज, अहम प्रस्तावों पर लगेगी मुहर

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को मिली मजबूती

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए भी यह काम बेहद अहम साबित हुआ। बेहतर सड़क नेटवर्क से पर्यटन, व्यापार और कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा मिला। पहाड़ों तक पहुंच आसान हुई और विकास की रफ्तार तेज हुई। भुवन चंद्र खंडूरी के कार्यकाल में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को भी मजबूती मिली। इस योजना का मकसद था गांव-गांव तक सड़क पहुंचाना। उत्तराखंड के कई दूरस्थ गांव ऐसे थे जहां पहली बार सड़क पहुंची। जिन इलाकों तक पहले सिर्फ पैदल जाना पड़ता था, वहां सड़क बनने से लोगों की जिंदगी बदल गई।

अधिकारियों को अपनी संपत्ति घोषित करने के लिए किया बाध्य

मुख्यमंत्री रहते हुए खंडूरी ने सिर्फ सड़क परियोजनाओं पर ही नहीं बल्कि प्रशासनिक सुधारों पर भी फोकस किया। उन्होंने अधिकारियों को अपनी संपत्ति घोषित करने के लिए बाध्य किया और शासन में पारदर्शिता लाने की कोशिश की। भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलना उनकी कार्यशैली का हिस्सा था।

पंचायतों में महिलाओं को मिला था 50 प्रतिशत आरक्षण

उनके कार्यकाल का एक बड़ा फैसला पंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देना भी रहा। पहले यह आरक्षण 33 प्रतिशत था। उस दौर में इसे सिर्फ राजनीतिक फैसला नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम माना गया। उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण की चर्चा जब भी होगी, इस फैसले का जिक्र जरूर होगा।

दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने थे भुवन चंद्र खंडूरी

भुवन चंद्र खंडूरी दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। पहली बार साल 2007 में और फिर 2011 में उन्होंने दोबारा सत्ता संभाली। हालांकि उनकी सख्त कार्यशैली के चलते उन्हें कई बार राजनीतिक विरोध का भी सामना करना पड़ा। आलोचक उन्हें रूखा और अक्खड़ बताते थे, लेकिन समर्थकों के लिए वही उनका फौजी अंदाज था जिसने उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाया।

यह भी पढ़ें -  LT शिक्षकों की वरिष्ठता सूची होगी सार्वजनिक

अति विशिष्ट सेवा पदक से हो चुके हैं सम्मानित

राजनीति में आने से पहले सेना में उनके योगदान के लिए उन्हें AVSM यानी अति विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किया जा चुका था। गढ़वाल से सांसद रहने वाले खंडूरी ने 2019 में खुद ही चुनावी राजनीति से दूरी बनाने का फैसला किया। उम्र बढ़ने के साथ भले ही वह सक्रिय राजनीति से दूर हो गए थे, लेकिन उत्तराखंड में उनका नाम आज भी एक ऐसे मुख्यमंत्री के तौर पर लिया जाता है जिसने सत्ता को सुविधा नहीं बल्कि जिम्मेदारी माना। भुवन चंद्र खंडूरी के निधन के साथ उत्तराखंड की राजनीति के एक अनुशासित और बेखौफ अध्याय का अंत हो गया

ADVERTISEMENTS Ad Ad

More in Uncategorized

Trending News