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टनकपुर में शारदा नदी किनारे अवैध कचरा डंपिंग का मामला पंहुचा एनजीटी, मानवाधिकार कार्यकर्ता विनय शुक्ला ने की सख्त कार्रवाई की मांग।

बनबसा (चम्पावत)।
टनकपुर नगर पालिका परिषद द्वारा शारदा नदी के नजदीक लंबे समय से की जा रही अवैध ठोस कचरा डंपिंग का गंभीर मामला अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तक पहुँच गया है। आरटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता विनय शुक्ला ने इस संबंध में NGT की प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली एवं उत्तराखंड ज़ोनल बेंच में विस्तृत शिकायत/अर्जी दाखिल कर पर्यावरणीय कानूनों के घोर उल्लंघन का आरोप लगाया है।
शिकायत में कहा गया है कि नगर पालिका द्वारा नदी किनारे खुलेआम कचरा डाले जाने से जल प्रदूषण, दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप, संक्रामक बीमारियों का खतरा और पारिस्थितिक तंत्र का विनाश हो रहा है। इससे न केवल शारदा नदी की जल गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। मामले में सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि मुख्य सचिव, उत्तराखंड के हालिया दौरे के दौरान कूड़े के ढेरों को हरी चादर से ढककर वास्तविक स्थिति छिपाने का प्रयास किया गया, जिसे शिकायतकर्ता ने भ्रामक, धोखाधड़ीपूर्ण और प्रशासनिक जवाबदेही से बचने का कुत्सित प्रयास बताया है।
➡️ पर्यावरणीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप..
शिकायत में नगर पालिका पर कई केंद्रीय पर्यावरणीय कानूनों के प्रथम दृष्टया उल्लंघन (Prima Facie Violations) का हवाला दिया गया है, जिनमें पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016, जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974, NGT के पूर्व आदेश (OA-606/2018 सहित) गंगा संरक्षण एवं प्रबंधन अधिनियम 2016 शामिल हैं। शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि शारदा नदी गंगा की सहायक नदी होने के कारण इसके संरक्षण की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।
➡️ Article 21 का उल्लंघन..
आरटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता विनय शुक्ला ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त ‘स्वच्छ पर्यावरण में जीवन के अधिकार’ का सीधा उल्लंघन बताते हुए कहा कि नगर पालिका परिषद टनकपुर की लापरवाही मानवाधिकार, स्वास्थ्य के अधिकार और पर्यावरणीय न्याय के खिलाफ है।
➡️ NGT से की गई प्रमुख मांगें..
आरटीआई व मानवाधिकार कार्यकर्ता विनय शुक्ला ने शिकायत के माध्यम से NGT से
शारदा नदी किनारे हो रही अवैध कचरा डंपिंग की स्वतंत्र जांच कराये जाने, नगर पालिका को तत्काल कचरा डंपिंग बंद करने और सभी डंपिंग स्थलों की वैज्ञानिक सफाई व पुनर्स्थापन के निर्देश दिए जाने, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्थल निरीक्षण कर फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट, जल नमूना जांच रिपोर्ट और पर्यावरणीय क्षति आकलन रिपोर्ट प्रस्तुत कराये जाने, दोषी अधिकारियों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क तय कर वसूली किये जाने, भविष्य में ऐसी गतिविधियों की पुनरावृत्ति रोकने हेतु सख्त निर्देश जारी किये जाने की मांग की गयी है।
अब यह देखना अहम होगा कि NGT इस गंभीर पर्यावरणीय मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है, लेकिन शिकायत के बाद टनकपुर नगर पालिका की भूमिका एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।
➡️विनय शुक्ला की कार्यशैली जन सरोकारों से रही है सम्बंधित…
आरटीआई एक्टिविस्ट विनय शुक्ला क्षेत्र में मूलभूत समस्या के समाधान व जनसरोकारों के कार्यों में अपना विशेष स्थान रखते है। उनके द्वारा अब तक सूचना अधिकार का प्रयोग कर मानवाधिकारों की रक्षा के लिए तत्परता के साथ जनहित में कार्य किया जाता रहा है। इसी क्रम में आम जनमानस के “मानव अधिकारों से हो रहा है खिलवाड़” को लेकर आरटीआई व मानवाधिकार कार्यकर्ता विनय शुक्ला के द्वारा गंभीर मामला जो नगर पालिका परिषद टनकपुर के द्वारा शारदा नदी के नजदीक डंपिंग जोन बनाकर किया गया है, उसके समाधान के लिए उन्होंने मानवाधिकार आयोग, जिला अधिकारी चंपावत एवं एनजीटी को शिकायत प्रेषित कर समस्या के समाधान हेतु अनूठा प्रयास किया जा रहा है।

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