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मणिपुर में महिला सुरक्षा और शांति बहाली सुनिश्चित करने के लिए उठाई तीन सूत्रीय मांगे

लालकुआं। मणिपुर में नफ़रती भीड़ द्वारा कुकी महिलाओं पर यौन हमले की वीभत्स घटना के पीड़ितों को न्याय देने की मांग पर 21 जुलाई को घोषित भाकपा माले के राष्ट्रीय प्रतिवाद दिवस पर माले, महिला संगठन ऐपवा, किसान महासभा, आइसा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कार रोड में जुलूस निकालकर कार रोड चौराहा, बिंदुखत्ता, लालकुआं में मणिपुर में हिंसा रोकने में पूरी तरह असफल रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का पुतला दहन किया।

कार रोड चौराहे पर हुई नुक्कड़ सभा में माले जिला सचिव डा कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, “मणिपुर की कूकी महिलाओं की बर्बर नग्न परेड व यौन हिंसा का वीडियो भाजपा के “डबल इंजन शासन” की असलियत को उजागर कर संघ ब्रिगेड की भीड़ हिंसा की संस्कृति की खौफनाक सच्चाई को सामने ला रहा है।

प्रधानमंत्री की इतने दिनों तक की चुप्पी ने इस अपराध की गंभीरता को बढ़ा दिया है। अगर उन्हें सचमुच लग रहा है कि जो हुआ वह “शर्मनाक” है और “मणिपुर की बेटियों” को न्याय देंगे तो कम से कम मानवता के विरुद्ध हुए इन अमानवीय अपराधों और मणिपुर में शासन की पूर्ण विफलता के लिए मणिपुर के मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से तत्काल इस्तीफा देने को कहें.”उन्होंने कहा कि, “मणिपुर मई के महीने से जल रहा है, लगभग 150 लोगों की मौत हो चुकी है और जातीय हिंसा के चलते हज़ारों लोग अपनी जगहों से उजड़ चुके हैं। मणिपुर और केंद्र दोनों जगह शासन कर रही भाजपा सरकार, मणिपुर के लोगों, खास तौर पर आदिवासियों की रक्षा करने में विफल रहे हैं। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, कुकी- जो समुदाय को विदेशी बताने वाली बात को आगे बढ़ाते हुए, खुद भी आदिवासियों के खिलाफ घृणा फैलाने में शामिल रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर का एक दौरा किया था उन्होंने वहां जाकर मुख्यमंत्री की पीठ थपथपाने का काम किया लेकिन मणिपुर में तब से अब तक हिंसा रोकने के लिए कुछ नहीं किया। भाजपा जब किसी राज्य में अपनी डबल इंजन सरकार चलाती है तो दंगे, बलात्कार और हत्याएं शासन करने का माध्यम बन जाते हैं। उत्तर पूर्व में नृजातीय और सांप्रदायिक हिंसा भड़काना भाजपाई शासन का तरीका है।

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“किसान महासभा के जिलाध्यक्ष भुवन जोशी ने कहा कि, “भाजपा राज में बिल्किस बानो हो या गुजरात के मुस्लिम विरोधी दंगों में यौन हिंसा झेलने वाली कोई और महिला, मुज़फ्फरनगर दंगों की बलात्कार पीड़ित महिलाएं हों या फिर मणिपुर में भीड़ हिंसा और सामूहिक बलात्कार की शिकार महिलाएं हों- हर मामले में महिलाओं के शरीर थे, जिनको “बदले” की आग का शिकार बनाया गया। इनमें से अधिकांश मामलों में स्त्रीद्वेषी हिंसा के अपराधियों को बचाने में राज्य की संस्थाएं शर्मनाक रूप से बेहद सक्रिय रूप में शामिल रही हैं। न्याय के लिए सामूहिक संघर्ष के जरिये ही पुलिस को अपराधियों पर कार्यवाही के लिए विवश किया जा सका है।

“अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन ‘ऐपवा’ नेता विमला रौथाण ने कहा कि, “कुकी महिलाओं पर भीड़ द्वारा यौन हमले की वीभत्स घटना का सामने आया वीडियो 04 मई का है लेकिन मणिपुर की भाजपा सरकार ने इतने लंबे समय से कोई कार्यवाही नहीं की।

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में यह घटना उस वक्त घटित हुई, जब ये महिलाएं अपने परिजनों के साथ, उनके गांवों को आग लगाती भीड़ से बचने के लिए नजदीकी इलाके में जाने की कोशिश कर रही थी। इन महिलाओं के कपड़े उतार दिये गए और इन्हें नग्न अवस्था में घूमने के लिए मजबूर किया गया। इन महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार, ‘बदले’ की कार्यवाही के तौर पर किया गया। रिपोर्ट तो यह भी है कि इन बलात्कार पीड़ित महिलाओं के पुरुष परिजनों की भीड़ ने हत्या कर दी।

पुलिस या मणिपुर सरकार द्वारा इस भयावह घटना के मामले में बिना कार्यवाही किये दो महीने से अधिक बीत गए। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल होने के बाद फेस सेविंग के लिए एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया, बाकी को अज्ञात बताकर संदेह का लाभ देने की शर्मनाक कोशिश की जा रही है। मणिपुर की पीड़ित महिलाओं के साथ एकजुटता में पूरा देश उनके लिए न्याय की मांग कर रहा है।

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“माले के बिंदुखत्ता सचिव पुष्कर सिंह दुबड़िया ने मणिपुर की घटना पर क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि, “वक्त और हालात का तकाज़ा है कि एकजुट हो कर कांगपोकपी की वीभत्स घटना के अपराधियों के खिलाफ तत्काल कार्यवाही की मांग की जाए और मणिपुर में शांति बहाल हो।

“आइसा जिला अध्यक्ष धीरज कुमार ने कहा कि, “मणिपुर में हत्या और महिला हिंसा के अपराधिक मामलों को मणिपुर की एन बीरेन सिंह की राज्य सरकार का सरंक्षण हासिल है। ऐसी सरकार को गद्दी पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।”प्रतिवाद दिवस पर मांगें उठाई गईं कि :

1. सभी अपराधियों की तत्काल शिनाख्त कर, गिरफ़्तारी हो. “अज्ञात ” भीड़ के नाम पर उन्हें बचाने की हर कोशिश का पर्दाफाश और प्रतिरोध करें।

2. मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस्तीफा दें।

3. हिंसा और बलात्कार की ऐसी तमाम घटनाओं की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच दल भेजा जाए, जिसमें महिलावादी वकील शामिल हों. उक्त जांच दल, ऐसी सभी घटनाओं में मणिपुर पुलिस की कार्यवाही का जरूर संज्ञान ले।

विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम में मुख्य रूप से डा कैलाश पाण्डेय, विमला रौथाण, भुवन जोशी, ललित मटियाली, पुष्कर सिंह दुबड़िया, नैन सिंह कोरंगा, कमल जोशी, धीरज कुमार, चंदन राम, गोविन्द सिंह जीना, निर्मला शाही, सुधा देवी, स्वरूप सिंह दानू, संजना, दिव्या, देवकी देवी, खीम सिंह मेहरा, सरूली देवी, त्रिलोक राम, खीम सिंह रावत, अजय पाल, जसोदा देवी आदि मुख्य रूप से शामिल रहे।

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