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डाटकाली मंदिर ही क्यों जा रहे हैं PM Modi, क्या है अंग्रेज़ों से जुड़ा इतिहास

प्रधानमंत्री मोदी 14 अप्रैल को उत्तराखंड दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान पीएम मोदी Delhi-Dehradun Expresway Inauguration करेंगे। एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने से पहले पीएम देहरादून-सहारनपुर सीमा पर स्थित प्रसिद्ध डाटकाली मंदिर में दर्शन कर मां काली का आशीर्वाद लेंगे। साथ ही यहां पूजा अर्चना कर वे एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे।

डाटकाली मंदिर ही क्यों जा रहे हैं PM Modi
अब आपके मन में भी सवाल उठ रहा होगा कि आखिर पीएम मोदी एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से पहले डाटकाली मंदिर ही क्यों जा रहे हैं? बता दें डाटकाली सिद्धपीठ मंदिर का इतिहास (Datkali temple history) बहुत पुराना है। इस मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में 13 जून 1804 में किया गया था। कहा जाता है कि जब अंग्रेज देहरादून-सहारनपुर हाईवे निर्माण करा रहे थे। उस समय डाटकाली मंदिर के पास ही एक सुरंग का निर्माण शुरू हुआ।

सुरंग के निर्माण कार्य में आ रही थी बाधाएं
निर्माण कार्य के दौरान पहाड़ से बार-बार मलबा आने के कारण रात में सुरंग अक्सर ब्लॉक हो जाती थी। ये सिलसिला लंबे समेत तक चलता रहा। जिस वजह से अंग्रेज बार-बार कार्य बाधित होने के चलते परेशान होने लगे। बताया जाता है कि जो इंजीनियर सुरंग का निर्माण कर रहा था वे भारतीय ही था। एक रात इंजीनियर के सपने में मां डाटकाली ने दर्शन दिए। मां ने कहा कि जहां पर सुरंग का निर्माण चल रहा है वहीं पर मेरी मूर्ति है।

इंजीनियर को मां डाटकाली ने दिए थे दर्शन
इस मूर्ति की स्थापना सड़क के पास की जाए, तो सुरंग निर्माण में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी। भारतीय इंजीनियर ने मां डाटकाली की मूर्ति महंत सुखबीर गुसैन को दी थी। उसके बाद मंदिर का निर्माण करवाया गया। जिसके बाद सुरंग और सड़क का निर्माण सकुशल संपन्न हो पाया। कहा जाता है कि लगभग 100 सालों से मंदिर के अंदर एक दिव्य ज्योत 24 घंटे जलती रहती है।

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डाटकाली मंदिर कहां है और इसकी खासियत क्या है?
डाटकाली मंदिर देहरादून के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। जो कि सहारनपुर-देहरादून हाईवे रोड पर स्थित है, जो देहरादून से महज 14 किलोमीटर की दूरी पर है। ये मंदिर मां काली को समर्पित है। मां काली को भगवान शिव की पत्नी देवी सती का ही अंश माना जाता है। इस मंदिर को मनोकामना सिद्धपीठ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि मंगलवार से 11 दिन तक अगर कोई डाट चालीसा पाठ पढ़ता है तो मां उसकी मनोकामना जरूर पूरी करती है

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