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हल्द्वानी चिंताजनक: सड़क हादसों में हर महीने दो हजार से ज्यादा लोग हो रहे घायल

हल्द्वानी। शहर और आसपास की सड़कों पर बेकाबू रफ्तार और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी जानलेवा साबित हो रही है। हादसों का सबसे भयावह असर अब अस्पतालों की इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटरों पर साफ दिख रहा है। पुलिस रिकॉर्ड और निजी अस्पतालों के आंकड़ों की पड़ताल से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में हर महीने करीब दो हजार से अधिक घायल इलाज के लिए अस्पतालों की चौखट पर पहुंच रहे हैं। इनमें एक बड़ी तादाद ऐसे मामलों की है जो ई-विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट या पुलिस डायरी में कभी दर्ज ही नहीं हो पाते। मामूली खरोंच से लेकर सिर, रीढ़ और अंदरूनी अंगों में गंभीर चोटों से जूझ रहे मरीज लगातार अस्पतालों में आ रहे हैं।

सरकारी आंकड़े बनाम अस्पताल की हकीकत
नैनीताल जिले में वर्ष 2026 के शुरुआती तीन महीनों में पुलिस ने 59 हादसों में 29 मौतों और 61 घायलों का आंकड़ा दर्ज किया। इसमें हल्द्वानी में 13 हादसों में 8 मौतें, काठगोदाम में 7 हादसों में 3 मौतें और लालकुआं में 13 हादसों में 6 मौतें शामिल थीं। हालांकि, यह तस्वीर अधूरी है। दरअसल, हादसे का शिकार होने वाले अधिकांश लोग पुलिस पचड़े से बचने के लिए सीधे नजदीकी निजी क्लीनिकों या अस्पतालों का रुख करते हैं। निजी चिकित्सालयों की पड़ताल में स्थिति बेहद गंभीर पाई गई। मैट्रिक्स हॉस्पिटल के डॉ. प्रदीप पांडे के अनुसार अकेले उनके अस्पताल में हर माह एक हजार से ज्यादा सड़क दुर्घटनाओं के केस आते हैं। वहीं साई अस्पताल के डा.मनीष मौर्य, कृष्णा के डा.जेएस खुराना और बृजलाल, साईं और नीलकंठ अस्पताल से मिले आंकड़े इस भयावह स्थिति पर मुहर लगाते हैं।

कुमाऊं भर में बढ़ रहा हादसों का ग्राफ
आरटीआई से मिले आंकड़ों के मुताबिक, कुमाऊं के छह जिलों में वर्ष 2024 में 370 हादसों में 250 मौतें हुईं। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 411 हादसों में 275 मौतों तक पहुंच गई। वहीं, वर्ष 2026 में जुलाई तक ही 465 हादसों में 309 लोग जान गंवा चुके हैं। नैनीताल जिले में जुलाई 2026 तक मौतों का आंकड़ा 86 पहुंच चुका है।

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तेज रफ्तार और मानवीय चूक मुख्य वजह
आरटीओ अरविंद कुमार पांडे के अनुसार, शहर में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों की पड़ताल में मानवीय लापरवाही और तकनीकी खामियां मुख्य वजह बनकर उभरी हैं। बेलगाम रफ्तार, बिना हेलमेट ड्राइविंग और गलत दिशा में वाहन दौड़ाना दुर्घटनाओं के सबसे बड़े कारण हैं। हल्द्वानी-काठगोदाम और लालकुआं रूट पर खतरनाक ओवरटेकिंग जानलेवा साबित हो रही है। इसके अलावा सड़कों पर पर्याप्त रोशनी का अभाव, खराब विजिबिलिटी और रोड इंजीनियरिंग की कमियां भी जोखिम बढ़ा रही हैं। मानवीय चूक और तकनीकी खामियों की पहचान के लिए क्षेत्र में वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया गया है और ब्लैक स्पॉटों को लेकर कार्य भी चल रहा है।

गंभीर मामलों में एसटीएच ही एकमात्र सहारा
हादसे में गंभीर रूप से घायल मरीजों के लिए डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय हल्द्वानी प्रमुख रेफरल सेंटर है। पहाड़ से लेकर तराई तक के गंभीर घायलों को यहां लाया जाता है। कई मरीज नैनीताल जिले के पर्वतीय क्षेत्रों, ऊधमसिंह नगर और आसपास के इलाकों से रेफर होकर भी यहां पहुंचते हैं। हाल के हादसों में इसकी तस्वीर दिखाई देती है। मार्च 2026 में बस हादसे में सात घायलों को एसटीएच लाया गया था। इनमें एक महिला का हाथ काटना पड़ा, जबकि अन्य घायलों को सिर और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में चोटें आई थीं। मई 2025 में ओखलकांडा के पटरानी हादसे में चार लोगों की मौत के बाद पांच घायलों को भी एसटीएच में भर्ती कराया गया था। दूसरी ओर, मामूली चोट वाले मरीजों का बड़ा हिस्सा निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में उपचार कराता है। हाल ही में बेलबाबा के पास हुए सड़क हादसे में दो स्कूटी सवार गंभीर रूप से घायल हुए थे। दोनों को एसटीएच लाया गया, लेकिन एक की उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि दूसरे का इलाज नैनीताल रोड स्थित निजी अस्पताल में चला।

सड़क हादसों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए ठोस और असरदार उपाय
हल्द्वानी। सड़क हादसों पर रोक लगाने के लिए पूर्व सहायक परिवहन आयुक्त राजेंद्र तिवारी के अनुसार निम्न बिंदुओं पर शहर में व्यापक काम करने की जरूरत है।

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ब्लैक स्पॉट्स का त्वरित ट्रीटमेंट: हादसों वाले चिन्हित डेंजर जोन और अंधे मोड़ों पर तत्काल क्रैश बैरियर, रंबल स्ट्रिप्स और दोनों तरफ उत्तल दर्पण (कन्वेक्स मिरर) अनिवार्य किए जाएं।

इंटेलिजेंट ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम: प्रमुख हाईवे और शहर के एंट्री प्वाइंट्स पर 360-डिग्री स्पीड रडार कैमरे लगाए जाएं, ताकि ओवरस्पीडिंग और रॉन्ग-साइड ड्राइविंग पर सीधा ऑटोमैटिक ई-चालान कटे।

रॉन्ग-साइड ड्राइविंग पर सख्त एक्शन: गलत दिशा में वाहन ले जाने वालों पर केवल जुर्माना न लगे, बल्कि गंभीर मामलों में सीधे वाहन सीज और ड्राइविंग लाइसेंस कम से कम 6 महीने के लिए सस्पेंड हो।

हाई-बीम और मॉडिफाइड हेडलाइट्स पर बैन: रात के समय दृश्यता बाधित करने वाली अनधिकृत एलईडी व तेज रोशनी वाली लाइटों की नियमित चेकिंग हो और तुरंत चालान काटा जाए।

ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया में सख्ती: केवल औपचारिकता पूरी करने के बजाय ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पास करना अनिवार्य हो, जिसमें लेन-ड्राइविंग और इमरजेंसी ब्रेकिंग का कड़ा टेस्ट लिया जाए।

व्यावसायिक चालकों की औचक फिटनेस जांच: डंपर, टैक्सी और बस चालकों के लिए नियमित रिफ्लेक्स टेस्ट, विजन टेस्ट और ब्रीथ एनालाइजर से शराब व नशीले पदार्थों की औचक जांच हो।

स्ट्रीट लाइटिंग व कैट्स आई इंस्टॉलेशन: अंधेरे वाले स्ट्रेच, चौराहों और पुलिया के पास हाई-मास्ट लाइटें, हाई-क्वालिटी रोड मार्किंग और सोलर कैट्स आई (रोड स्टड्स) लगाए जाएं ताकि रात में सड़क की बनावट साफ दिखे।

हेलमेट व सीटबेल्ट पर जीरो टॉलरेंस: पिछली सीट पर बैठने वाले सवारियों के लिए भी हेलमेट और सीटबेल्ट नियम का शत-प्रतिशत पालन कराया जाए, साथ ही घटिया स्तर के गैर-आईएसआई हेलमेट की बिक्री रोकी जाए।

सड़क किनारे अवैध पार्किंग और अतिक्रमण मुक्त फुटपाथ: मुख्य मार्गों के शोल्डर (सड़क किनारे) पर अनधिकृत पार्किंग और अतिक्रमण को पूरी तरह साफ किया जाए, जिससे राहगीरों को सड़क के बीच में न चलना पड़े।

गोल्डन ऑवर रेस्क्यू नेटवर्क: हाईवे और मुख्य चौराहों पर जीपीएस-सक्षम एम्बुलेंस की 24×7 तैनाती हो, ताकि घायल को हादसे के पहले 60 मिनट गोल्डन ऑवर के भीतर निकटतम ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया जा सके

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