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हल्द्वानी- जमानत के बाद भी जेल में बंद रही ब्लॉगर ज्योति अधिकारी, खटीमा केस में बी-वारंट बना रिहाई में बाधा

मीनाक्षी

हल्द्वानी न्यूज़- मुखानी थाने में दर्ज मामलों में जमानत मिलने के बावजूद ब्लॉगर ज्योति अधिकारी की मंगलवार को जेल से रिहाई नहीं हो सकी। इसका कारण यह रहा कि ज्योति के खिलाफ ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा और रुद्रपुर तथा अल्मोड़ा जिले में भी अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज हैं। खटीमा मामले में पुलिस द्वारा जेल प्रशासन के समक्ष बी-वारंट दाखिल किए जाने के चलते ज्योति को उपकारागार में ही रहना पड़ा। अब बुधवार को उसे दूसरे मामले में संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा।

ब्लॉगर ज्योति अधिकारी के खिलाफ पहला मामला हल्द्वानी के मुखानी थाने में दर्ज हुआ था। जूही चुफाल नाम की युवती ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में ज्योति अधिकारी देवी-देवताओं और पहाड़ की महिलाओं को लेकर अभद्र टिप्पणी करती नजर आ रही है। साथ ही वीडियो में वह सार्वजनिक स्थान पर दराती लहराते हुए दिखाई दी। इस आधार पर पुलिस ने धार्मिक भावनाएं आहत करने, आर्म्स एक्ट सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
इसके बाद आठ जनवरी को पुलिस ने ज्योति अधिकारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसी बीच मुखानी थाने में ही वादी को धमकाने के आरोप में उसके खिलाफ एक और मामला दर्ज किया गया। वहीं, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर बाद में खटीमा, रुद्रपुर और अल्मोड़ा में भी अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गईं। मुखानी थाने में दर्ज दोनों मामलों में जमानत को लेकर न्यायिक मजिस्ट्रेट विशाल ठाकुर की अदालत में सुनवाई हुई। लंबी बहस के बाद अदालत ने ज्योति अधिकारी की जमानत मंजूर कर ली। जमानत मिलने के बाद परिजनों और परिचितों को उम्मीद थी कि शाम तक हीरानगर स्थित उपकारागार से उसकी रिहाई हो जाएगी, लेकिन खटीमा केस में दाखिल बी-वारंट के चलते यह संभव नहीं हो सका।जेल अधीक्षक प्रमोद पांडे ने बताया कि खटीमा में दर्ज मामले को लेकर पुलिस द्वारा बी-वारंट प्रस्तुत किया गया है, जिस कारण जमानत के बावजूद कैदी को रिहा नहीं किया जा सका।
लंबी दलीलें, माफी मांगने को भी तैयार
ज्योति अधिकारी की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र बिष्ट, गौरव कपूर सहित अन्य वकीलों ने अदालत में जमानत के पक्ष में कई दलीलें पेश कीं। बचाव पक्ष ने कहा कि ज्योति का उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना या समाज को भड़काना नहीं था। तहरीर में वीडियो की न तो तारीख और न ही स्थान का उल्लेख है। दराती हाथ में लेने का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था। अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि ज्योति समाज में गलत संदेश जाने पर वीडियो के माध्यम से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को भी तैयार है।

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