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राष्ट्रीय

काव्य कोना

अब आप ‘काव्य कोना, के अंतर्गत कविताओ का आनंद भी उठा सकते हैं।

*ये रिश्ता तेरा मेरा*

खोजता हूँ अतीत के पन्नों में खुद को
बैरंग लौट आये खतों की तरह,
तलाशता हूं अंगुलियों पर निशान
ढल चुके सूरज की किरणों की तरह
खुद को समेटने की कोशिशें बहुत की
गुलाब पर उतरती ओस की तरह
मैं नसीब समझता रहा तुम्हें अपना
आसमां से गिरते सितारों की तरह

मैं करीब समझता रहा तुम्हें,
अंधेरे में चमकते जुगनुओं की तरह
पल भर मिले फिर गुम हो गए तुम
गुलिस्तां में हवा के झोकों की तरह
न दिखता न छुपता ये रिश्ता तेरा मेरा
भीड़ में तैरती सुन्न निगाओं की तरह
इतना तन्हा हूं कि दुश्मनों से भी कहा
पास आ जाओ चंद लम्हों की तरह
यूं तो कम न था तुझसे प्यार मेरा,
छुपाकर भुला लिया तेरे खतों की तरह
तुझसे आरजू भी कैसे करता,
मेरा प्यार लौटा दो दौलतों  की तरह

*-रमन दीप सिंह बनारस*

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