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चुनाव पर कविता

चुनावी बिगुल बजने लगा
दंगल रोज सजने लगा
कोई लौट कर आया है
संग अपने वादें कितने लाया है
गिरगिट सा रंग बदलने लगा
रातों को भी ये जगने लगा
आज हर वादा ये करने लगा
पर पब्लिक है सब जानती है पब्लिक है सब पहचानती है
मैं हर वादा निभाऊंगा
देख मैं लौट कर आऊंगा
मुझको बस सरकार बना दो
बस एक बार बना दो
मैं हर वादा निभाऊंगा
हार खुद की जब ना पचा पायेंगे
सारा इल्जाम ई. वी. एम. पर लगायेंगे
राजनीति का बुरा हाल हो गया
मूक भी अब यहां वाचाल हो गया
कोई लौट कर आया है
संग अपने वादें कितने लाया है। यह कविता ग्राम बिरिया झनकट उधम सिंह नगर जिले की कवयित्री बसंती सामंत ने पर्वत प्रेरणा न्यूज को लिखकर भेजी है।

आपको बताते चलें कि कवित्री बसंती सामंत को कविता लेखन के क्षेत्र में अटल हिंदी सम्मान,2020काव्य प्रभा कवि सम्मान, 2020 fisa द रियल सुपर वुमन, 2021उत्तराखंड महिला रत्न, उत्तराखंड नारी गौरव सम्मान जैसे कीर्तिमान सम्मानो से नवाजा जा चुका है।

संवाददाता:- गौरव शर्मा टनकपुर

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