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कविता

नैनीताल, मल्लीताल से हेमन्त सिंह डंगवाल ने हमें कविता भेजी है।कविता का शीर्षक है ‘मेघ उमड़ रहे है नील गगन में काले काले

मेघ उमड़ रहे है नील गगन में काले काले
बरस पड़ो अब धरा पे रिम झीम रिम झीम
सूखे साखो को फिर से अपनी बूदो से सीच के नव जीवन दे दो
इस धरा पे अपनी अमृत बूदो से फसलों को आबाद करा दो
चलो फिर से मायूस चहेरो पे मुस्कान दिला दो
रिमझिम रिमझिम वर्षा कर के
फिर से वो बचपन के खेल याद दिला दो
बागो मे सुने पड़े झूलो को आबाद कर दो
रंग बिरंगी फूलो की फुलवारी की वो प्यारी सी मुस्कान से धरा पे रंग बरसा दो
अपनी बूदो से फिर धरा को हरा श्रंगार करा दो।

हेमंत सिंह डंगवाल
ए टी आई मल्लीताल
नैनीताल

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