पढ़ने की उम्र में पेट पालने की चिंता….

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संवाददाता – शंकर फुलारा

हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज छात्र संघ चुनाव में प्रत्याशियों द्वारा प्रचार सामग्री में खूब धन पानी की तरह बहाया गया। इसकी जीती जागती तस्वीरें आप देख सकते हैं।
प्रत्याशियों द्वारा प्रचार सामग्री में खूब पैसा पानी की तरह गाया गया। एमबीपीजी कॉलेज का आसपास का क्षेत्र चुनाव समाप्त होने के बाद पंपलेटों से पटा हुआ नजर आया। और बिखरी प्रचार सामग्री से इन नन्हे से बच्चों ने पढ़ने की उम्र में इस प्रचार सामग्री को इकट्ठा कर अपना पेट पालने का शाम का इंतजाम किया। कल कैसे पेट भरेगा इसका कुछ पता नहीं।

इंतजाम समझ इसको इकट्ठा करना शुरू कर दिया। यह नन्हे-मुन्ने छोटे बच्चे पढ़ने की उम्र में अपने पेट की खातिर कूड़ा बीनने को मजबूर है। कॉलेजों में हर साल छात्र संघ चुनाव के समय छात्रसंघ प्रत्याशियों द्वारा चुनावी वादे तो बहुत किए जाते हैं लेकिन कभी किसी की नजर इन गरीब नन्हे-मुन्ने बच्चों पर नहीं पड़ती। लेकिन यह तस्वीरें सरकार के बच्चों के पढ़ने के इंतजामों की भी पोल खोलती हैं। आखिर यह नन्हे मुन्ने बच्चे बच्चों को पढ़ने की उम्र में पेट पालने की चिंता से छुटकारा कब और कैसे मिलेगा यह इसका उत्तर ना तो सरकार के पास है ना ही प्रशासन के पास।

सरकार की गरीब बच्चों के लिए चलाई जाने वाली कल्याणकारी योजनाएं भी कागजों और मीडिया में फोटो खिंचाने तक ही सीमित है।

जमीनी हकीकत की तस्वीरें हम अपने चैनल के माध्यम से समय पर सरकार और प्रशासन को जगाने के लिए दिखाते रहते हैं।

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