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नवल प्रभात -वंदना


नूतन सोच संग नव उमंग का,
हर मन में सदा ही हो संचार।
प्रेम भाव के दीप जले अब,
तब मानवता की हो जयकार।।…..
बँधे एकता सूत्र में हम सब,
मिले नवल प्रभात में यही वरदान।
भारत भू की एकता जग में,
बन जाये हम सबकी पहचान।।…
सभी करते हैं जल थल नभ में,
सदा जग निर्माता का गुणगान।
सत्य पथ पर अडिग रहें हम,
प्रभु साहस मिले सद्बुद्धि ज्ञान।।…
अब किरणें फैले पावनता की,
हर आँगन बहे खुशियों की धार।
प्रभु अन्तर्मन की जगे चेतना,
करते विनती हम सब बारम्बार।।
नूतन सोच संग नव उमंग का,
हर मन में सदा ही हो संचार।
प्रेम भाव के दीप जले अब,
तब मानवता की हो जयकार।।…..

रचनाकार –भुवन बिष्ट
रानीखेत (उत्तराखंड)

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